बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 327, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३२६ ) ७१. जिस स्त्री का पेट छोटा तथा कोमल त्वचा बाला हो वह श्रेष्ठ होती है । ७२. घड़े के समान पेट वाली स्त्री दरिद्री होती है । ७३. यदि पेट बहुत चौड़ा हो तो वह दुर्भाग्यशाली होती है । ७४. लम्बे पेट वाली स्त्री ससुर या जेठ का नाश करती है । ७५. जिसके पेट पर तीन बल या तीन रेखाएं पड़ती हों वह भाग्यवान होती है । ७६. जिसके रोम सीधे और पतले हों वह सुख उठाने वाली होती है । ७७. जिसकी रोम पंक्ति टेढ़ी-मेढ़ी हो वह विधवा होती है । ७८. जिसका सीना बिना रोम का हो वह अपने पति की प्रिय होती है । ७९. जिसका सीना विस्तृत हो वह निर्दयी होती है । ८०. अठारह अंगुल चौड़ा सीना शुभ माना गया है । अर्थात् स्त्री का सीना छत्तीस अंगुल का होना चाहिए । ८१. यदि स्तन कठोर गोल तथा दृढ़ हों तो वे शुभ हैं । ८२. यदि स्तन मोटे तथा सूखे हुए हों तो वे दुख देने वाले होते हैं । ८३. यदि स्त्री का दाहिना स्तन ऊंचा हो तो सौभाग्यशाली होती है । ८४. जिस स्त्री के दोनों स्तन दबे हुए हों वह कुलटा होती है । ८५. जिस स्त्री के स्तनों के अग्र भाग काले तथा गोल हों वह शुभ माना गया है । ८६. जिस स्त्री की हंसुली मोटी हो वह ऐश्वर्य भोगी होती है । ८७. जिसकी हंसुली ढीली-ढाली हो वे दरिद्री होती है । ८८. यदि स्त्री के कंधे झुके हुए न हों तो शुभ है । ८९. यदि स्त्री के कंधे टेढ़े मोटे और बाल युक्त हों तो वह विधवा होती है । ९०. यदि आगे को कुछ झुके हुए और मजबूत हों तो वह आनन्द करती है । ९१. यदि उसकी भुजाएं कोमल तथा सीधी और रोम रहित हों तो यह शुभ माना गया है । ९२. यदि भुजाएं बालों से भरी हुई हों तो वह विधवा होती है । ९३. जिन स्त्रियों की भुजाएं छोटी हों वे दुख उठाती हैं । ९४. यदि हथेली लाल तथा छिद्र रहित हो तो वह सौभाग्यशालिनी होती है । ९५. यदि हथेली बहुत-सी नसों वाली या बहुत अधिक रेखाओं वाली हों तो दरिद्री होती है । ९६. यदि नख लाल और उभरे हुए हों तो शुभ है । ९७. पीले नख दरिद्रता के सूचक हैं । ९८. नखों पर सफेद बिन्दु कुलटा का संकेत करते हैं । ९९. जिसकी पीठ झुकी हुई हो वह दुख उठाने वाली होती है ।