बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३२७ ) १००. जिस स्त्री की पीठ मे बहुत अधिक बाल हों वह विधवा होती है । १०१. सीधी दृष्टि वाली स्त्री पुण्यवान होती है । १०२. जिस स्त्री की दृष्टि नीचे की ओर झुकी हुई हो वह अपराधिनी होती है । १०३. यदि दोनों आंखें अधिक निकट हों तो वह स्त्री धोखा देने वाली होती है । १०४. जिसकी आंखें बहुत दूर वह मूर्ख होती है । १०५. यदि ललाट में तिल हो तो वह जीवन भर आनन्द उठाती है । १०६. यदि हृदय पर तिल हो तो यह सौभाग्यदायक होता है । १०७. जिस स्त्री के दाहिने स्तन पर तिल हो वह अधिक कन्याएं पैदा करने वाली होती है। १०८. यदि बायें कुच पर लाल तिल हो तो वह विधवा होती है । १०६. जिसकी नाक के अग्र भाग में लाल तिल हो वह पति की प्रिय होती है। ११०. जिसकी नाक के आगे के भाग में काला तिल हो वह दुराचारिणी होती है । १११. जिसकी नाभी के नीचे तिल हो वह शुभ है । ११२. जिसके बायें हाथ में तिल हो वह सौभाग्यशाली होती है । ११३. जिसके गाल होठ, हाथ, कान, या गले पर तिल हो तो वह जीवन भर सुख पाती है। स्त्री की इक्कीस जातियां : स्त्री की २१ जातियां होती हैं जिनका वर्णन संक्षेप में नीचे की पंक्तियों में स्पष्ट किया जाता है। पद्मिनी स्त्री :—ऐसी स्त्री दया और स्नेह रखने वाली, चित्त को मोहित करने वाली, हंस के समान चलने वाली तथा माता-पिता की सेवा करने वाली होती है। इसके शरीर से कमल के समान सुगंध निकलती है। वह सुन्दर, सामने वाले को प्रभावित करने वाली तथा पति सेवा में लीन रहती है। इसके नाक, कान, तथा होठ छोटे होते हैं। शंख के समान गर्दन और कमल के समान चेहरा होता है। ये स्त्री सौभाग्यवती, कम सन्तान उत्पन्न करने वाली और पतिव्रता होती है। २ चित्रिणी:—ऐसी स्त्रियां पतिव्रता और सब पर स्नेह करने वाली होती हैं । श्रृंगार आदि में उनकी रुचि रहती है। ये ज्यादा परिश्रम नहीं करतीं पर बुद्धिमान होती हैं। इनका मस्तिष्क गोल तथा नेत्र चंचल होते हैं। इनकी चाल हाथी के समान स्वर मोर के समान होता है। ऐसी स्त्रियां कोमल अंगों वाली तथा लज्जा रखने वाली होती हैं। ऐसी स्त्रियां नृत्य प्रेम तथा सुन्दरता से पति को प्रसन्न रखने वाली होती हैं।