भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ३१७ ) नाक :

नाक की आकृतियां

1 | 2 | 3 4 | 5 | 6 7 | 8 | 9 10 | 11 | 12 १. यदि चार अंगुल लम्बी नाक हो तो वे दीर्घायु होते हैं । २. जिसकी नाक उभरी हुई हो वे सदाचारी होते हैं । ३. हाथी के समान नाक वाला व्यक्ति भोगी होता है । ४. तोते के समान नाक रखने वाला व्यक्ति सुखी होता है । ५. जिसकी नाक सीधी हो वह सौभाग्यशाली होता है । ६. जिनके नथुने छोटे हों वह भाग्यवान पुरुष होते हैं । ७. जिसके नाक का आगे का हिस्सा टेढ़ा हो वह आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होता है । ८. नुकीली नाक वाला राजा होता है । ६. छोटी नाक वाला धर्मात्मा होता है । १०. जिसकी नाक का आगे का हिस्सा दो भागों में बंटा हुआ हो वह दरिद्र होता है । ११. चपटी नाक वाला व्यक्ति सरल स्वभाव वाला होता है । १२. कटी हुई नाक वाला व्यक्ति पापी होता है । १३. दाईं ओर झुकी हुई नाक कमजोरी का चिह्न है ।