भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ३१८ ) १४. बड़े नथुने श्रेष्ठ कहलाते हैं । १५. स्त्रियों में यदि नाक छोटी हो तो वह मजदूर स्वभाव वाली होती है । १६. चपटी और लम्बी नाक वाली स्त्री विधवा होती है । १७. यदि नाक के आगे का हिस्सा लम्बाई लिए हुए हो तो वह रानी के समान सुख भोगती है । १८. यदि नाक के आगे की नोंक पर काला तिल या मस्सा हो तो वह दुराचारिणी होती है । १९. अत्यधिक लम्बी नाक वाली स्त्री सुखहीन होती है । २०. सुडौल और समान छिद्र वाली नाक श्रेष्ठता की सूचक है । मुख : — मुखाकृति — १. यदि छोटा मुंह हो तो वह अच्छा कहलाता है । २. यदि बहुत अधिक फैला हुआ तो यह दरिद्रता का सूचक है । ३. यदि मुंह चौड़ाई लिए हुए हो तो अशुभ कहलाता है ।