भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ३३० ) १९. कुलच्छेदिनी : यह स्त्री जिस घर में भी जाती है उसको दरिद्र बना देती है। यह पाप कर्म से प्रेम करती है। पति को बात-बात पर धोखा देती है। माता, पिता, पति, भाई, ससुर, आदि की किसी की इज्जत की यह परवाह नहीं करती और लगभग दुराचारिणी होती है। २०. नारकी : ऐसी स्त्री छोटी आंखों वाली तथा पाप कार्यों में रत रहने वाली होती है। यह आपस में एक दूसरे की लड़ाई कराने में प्रसन्न होती है। ऐसी स्त्री दगाबाज तथा असत्यभाषिणी होती है। २१. स्वर्गिणी : ऐसी स्त्री उत्तम विचार रखने वाली, धर्म को मानने वाली, तथा सभी के साथ मधुर व्यवहार करने वाली होती है। ईश्वर में इसका चित्त बहुत अधिक रहता है। यह छोटे बड़े का सम्मान करना जानती है। इसकी वाणी मीठी होती है। समाज में इसका सम्मान होता है। पति को ईश्वर से भी ज्यादा सम्मान देती है। ऊपर मैंने स्त्रियों के कुछ भेद स्पष्ट किये हैं। इसके अलावा माननी, घारकी, दुष्टा, पातकी आदि भी स्त्रियों के भेद होते हैं। कुल भेद ६४ माने गये हैं जिनमें ऊपर लिखे हुए इक्कीस भेद मुख्य होते हैं।