बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 334, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३३३ ) डा० श्रीमाली ने उस हाथ को देखकर ज्यों का त्यों उसके बारे में पूर्ण विवरण स्पष्ट कर दिया । दूसरी बार उनके द्वारा पूर्ण सही भविष्यकथन को देखकर मैं अपनी एक परिचित महिला को लेकर उनके निवास स्थान पर पहुंचा और उनसे निवेदन किया कि मैं प्रकाशक महोदय की तरफ से आ रहा हूं और आप द्वारा प्रकाशित पुस्तक के अन्तिम पृष्ठों में व्यावहारिक हस्तरेखा ज्ञान से संबंधित एक परिशिष्ट देने का विचार है। कृपया आप इस महिला का हाथ देखें और इस से संबंधित जानकारी देने का कष्ट करें । डा० श्रीमाली ने उस महिला के हाथ को देखकर जो भविष्यफल स्पष्ट किया उसका विवरण निम्न प्रकार से है। पाठक भी इस जानकारी को हस्त रेखा के माध्यम से समझें। इसके लिए उस महिला का हाथ का चित्र यहां पर दिया जा रहा है। इससे पहले यह ध्यान रहे कि जब मैं और संबंधित महिला डा० श्रीमाली से मिले तब न तो उस महिला के नाम व अन्य बातों के बारे में जानकारी दी और न उन्होंने इस संबंध में कुछ भी पूछा । हाथ को स्पर्श करते ही डा० श्रीमाली ने बताया कि हाथ में गुरु, शनि, सूर्य तथा बुध पर्वत पूर्णतः विकसित हैं और यह कोमल, मुलायम तथा आदर्श श्रेणी का हाथ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि महिला सुसंस्कृत घराने की है और इसके पिता के घर में और पति के घर में अनुकूल तथा सभ्यतापूर्ण वातावरण रहता है। साथ ही इस महिला के संस्कार अपने आप में सांस्कृतिक धार्मिक तथा अनुकूल रहे हैं। वस्तुतः यह एक सुन्दर और भाग्यशाली हाथ दिखाई देता है। परन्तु सूर्य रेखा सीधी होते हुए भी बीच मे से कट गई है; अतः शिक्षा सामान्य रही होगी । यद्यपि बचपन में शिक्षा के लिए प्रयत्न किया होगा परन्तु इस महिला की मामूली शिक्षा ही दिखाई देती है। ज्यादा से ज्यादा यह महिला आठवीं कक्षा से अधिक नहीं पढ़ी होगी। यद्यपि चेहरे से यह महिला पूर्ण शिक्षित तथा विदुषी दिखाई देती है और ऐसा प्रतीत होता है कि महिला कम से कम ग्रेजुएट होनी चाहिए । परन्तु हाथ की रेखाएं असत्य नहीं बोलतीं और ये रेखाएं इस बात की साक्षी हैं कि शिक्षा में निरन्तर व्यवधान आता रहा और इसी कारण यह महिला बहुत ही कम शिक्षा ले पाई होगी । जीवन रेखा को देखने पर आश्चर्यजनक तथ्य ज्ञात हो रहे हैं। जीवन रेखा का प्रारंभ ही कई रेखाओं से मिलकर हुआ है अतः बचपन के प्रारंभिक वर्ष रोग-ग्रस्त रहे होंगे और संक्षेप और सूक्ष्मता से देखने पर यह भली-भांति स्पष्ट हो जाता है ! कि जीवन के ५वें वर्ष में ही कोई बहुत बड़ी बीमारी आई होगी; क्यों कि यहां पर जीवन रेखा कटी हुई है और उसका संबंध मस्तिष्क रेखा से बन गया है। अतः यह