भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 336

( ३३५ ) ठहरिये, अब मैं यह बता दूं कि आप माता-पिता के अभिभावकत्व में कब तक रहीं, अर्थात् आपका विवाह कब हो गया ? पंडितजी ने गणना करते हुए बताया कि आपका विवाह १४ वर्ष की छोटी- आयु में ही हो जाना चाहिए और गहराई से देखने पर यह ज्ञात होता है कि आपकी विवाह रेखा सीधी है अतः जीवन का कम हिस्सा ही आपने अपने पिता के घर में व्यतीत किया होगा । अतः ज्यों ही आपके १४ वर्ष पूरे हुए होंगे कि आपका विवाह हो गया होगा । ज्यादा से ज्यादा १४ वर्ष तथा एक या दो महीने बीते होंगे कि आप का विवाह हो गया होगा । मुझे आश्चर्य होता है कि आपका विवाह इतनी छोटी उम्र में ही कैसे हो गया ? क्या आपके समाज में छोटी उम्र में ही विवाह हो जाते हैं । महिला ने स्वीकृति में गर्दन हिलाई और बताया कि वास्तव में मेरा विवाह १४ वर्ष और एक महीने के बाद ही हो गया था । पंडितजी ने रेखाओं का अध्ययन जारी रखते हुए बताया कि आपका पति प्रारम्भ में अत्यन्त सामान्य श्रेणी का होना चाहिए अर्थात् आपको जो ससुराल मिला होगा वह आपके पीहर के स्तर के अनुरूप ही होगा । आर्थिक दृष्टि से भी और सामाजिक दृष्टि से भी और एक प्रकार से देखा जाय तो जिस समय आपकी शादी हुई उस समय आपके पति की सामाजिक प्रतिष्ठा अत्यन्त नगण्य होनी चाहिए । आपके हाथ में शुक्र वलय भी दिखाई दे रहा है । यद्यपि यह वलय पूरा तो नहीं बना है परन्तु यह वलय इस बात की साक्षी तो दे ही रहा है कि आपके जीवन में ससुराल में आने के बाद से बराबर परेशानियां, मानसिक कठिनाइयां तथा चिंताएं रहीं होंगी । शारीरिक रूप से आप इतनी परेशान भले ही न रही हों, परन्तु मानसिक दृष्टि से तो आप जरूरत से ज्यादा चिन्ताओं तथा परेशानियों में रही होंगी और एक क्षण के लिए भी आपको आराम नहीं रहा होगा । महिला ने स्वीकृति में सिर हिलाया और पूछा—यह स्थिति कब तक है ? श्रीमाली जी हंसे, और बोले कब तक है ? का कोई तात्पर्य नहीं क्योंकि यह स्थिति भी और अब तक आपकी आयु लगभग ४२ को पार कर रही है अतः ज्यादा से ज्यादा इस प्रकार की मानसिक परेशानियां विवाह के १५ वर्षों तक रही होंगी । मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि १४वें वर्ष से ३१ वें वर्ष की आयु तक आपका जीवन जरूरत से ज्यादा मानसिक संघर्षों में व्यतीत हुआ होगा । एक क्षण के लिए भी आप को अपने जीवन में आराम नहीं मिला होगा और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस अवधि में आपको पति की तरफ से भी किसी प्रकार का कोई सहयोग मिला हो ऐसा दिखाई नहीं देता ।