भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १४२ ) रेखाएं हैं वे आपके जीवन में बाधाओं की सूचक हैं और जिसके बारे में मैं कुछ समय पहले स्पष्ट कर चुका हूँ। यद्यपि शुक्र पर्वत हथेली की ओर बढ़ा हुआ भी है और इससे यह स्पष्ट होता है कि आपके जीवन में भौतिक और आध्यात्मिक साधनाओं का परस्पर समन्वय रहा है। एक प्रकार से देखा जाय तो आपके जीवन में भोगमयी वृत्तियों पर धार्मिक वृत्तियों का प्रभाव विशेष रूप से रहा है और यह आपके जीवन में अनुकूल ही रहा है। अंगूठा पूर्ण लम्बा तथा पीछे की ओर खींचा हुआ है इससे आपकी दृढ़ मनो- वृत्ति स्पष्ट होती है। यह अंगूठा इस बात का भी परिचायक है कि आप अपने जीवन में अपने विचारों पर दृढ़ रहती हैं। एक बार आप जो निश्चय कर लेती हैं उसे पूरा करके ही छोड़ती हैं। चाहे उसके लिये कितनी ही परेशानियां उठानी पड़ें। अंगूठे का पहला पोर कुछ लम्बाई लिए हुए है और अपने आप में सुदृढ़ है। यह सुदृढ़ता आपमें तर्क शक्ति की भावना का विकास करने में सहायक है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आप कोई भी कार्य आंख मूंद कर नहीं कर लेतीं। अपितु आप उस कार्य में या तो संशोधन करती हैं अथवा उस कार्य में कुछ नवीनता देने का प्रयत्न करती हैं। इस अंगूठे के पर्व को देखने से यह भी ज्ञात होता है कि दूसरों की आलोचना आपको थोड़े बहुत रूप में प्रिय है। यदि आपके अलावा किसी अन्य ने कार्य किया होगा तो आप उस कार्य में या तो त्रुटि निकालने का प्रयत्न करेंगी अथवा यह सुझाव देने से बिल्कुल नहीं हिचकेंगी कि यदि यह कार्य इस प्रकार से न होकर इस तरीके से होता तो ज्यादा उपयुक्त एवं अनुकूल होता। अंगूठे के जड़ में जहां शुक्र पर्वत का विकास प्रारंभ हुआ है वह उभरा हुआ है। और यह उभरा हुआ विकास आपको भौतिकता की ओर भी प्रवृत्त करता है। आपकी यह भावनाएं बराबर मन में बनी रही हैं कि आप शान-शौकत से रहें, तरीके से रहें, प्रदर्शन प्रियता का थोड़ा बहुत मोह आपके मन में बराबर बना रहा है। शुक्र पर्वत पर एक आड़ी रेखा इन बाधा रेखाओं को काटती हुए मंगल पर्वत तक गई है। और जहां से यह रेखा प्रारम्भ हुई है उससे यदि आयु रेखा का मिलान करें तो ज्ञात होता है कि वह अवस्था आपके जीवन की ४३वें वर्ष में आती है। मंगल भूमि का स्वामी है तथा शुक्र भौतिक सुख का अधिकारी है। अतः ऐसा ज्ञात होता है कि जीवन के ४३वें वर्ष की समाप्ति तथा ४४वें वर्ष के प्रारंभ तक आपको अपना स्वयं का मकान सुख प्राप्त होगा। यह अलग बात है, कि आप स्वयं किसी प्रकार की नौकरी नहीं करती होंगी या आपके स्वयं के कोई आय के स्रोत नहीं होंगें परन्तु आपके पति के द्वारा उपार्जित धन से उनके सहयोग से यह मकान योग का समय सिद्ध होता है। मंगल रेखा के पास ही एक छोटा-सा चतुर्भुज जीवन के ३७वें वर्ष में बना