बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३४१ ) भव किया होगा कि वे घटनाएं आगे चलकर बिल्कुल सही उतरी हैं । यह आपके सरल और निश्छल हृदय का परिचायक है । साथ ही साथ यह तथ्य इस बात का भी सूचक, है कि आप पर प्रभु की विशेष कृपा है । आपके इस बुध पर्वत पर चन्द्र से एक रेखा आकर मिलती है। अतः आपके जीवन में विदेश यात्रा योग भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है । यद्यपि भाग्य रेखा का सम्बन्ध भी यहीं स्पष्ट होता है अतः आपके जीवन के ४१वें वर्ष में, ४३वें वर्ष में तथा ४६वें वर्ष में विदेश यात्रा योग स्पष्ट है । इन विदेश यात्राओं में अन्तिम दो यात्राएं अत्यधिक महत्वपूर्ण एवं अनुकूल रहेंगी । इनमें से अधिकतर विदेश यात्राएं पति के साथ होंगी परन्तु ऐसा भी ज्ञात हो रहा है कि जीवन के ५६वें वर्ष में पुत्र के साथ भी विदेश यात्रा योग दिखाई दे रहा है । इन विदेश यात्राओं से आप अधिकतर यूरोप तथा अमेरिका का हिस्सा देख सकेंगी। यद्यपि ये सभी यात्राएं एक महीने से चार महीने की अवधि तक की होंगी । परन्तु ये विदेश यात्राएं एक तरफ जहां आपके अनुभव को बढ़ाने में सहायक होंगी वहीं दूसरी तरफ ये यात्राएं आपके स्वास्थ्य की दृष्टि से भी तथा मानसिक परेशानियों को भी कम करने के लिये अनुकूल रहेंगी । इसके अलावा आपके जीवन में लगभग पूरे भारत की यात्रा तथा कई बार तीर्थ यात्रा का योग है । आपके हाथ में चन्द्र पर्वत कुछ दबा हुआ है तथा हथेली में अन्दर की ओर खिसका हुआ है । अतः इस पर्वत से आपको मानसिक परेशानियां तथा कठिनाइयां रहेंगी । जैसा कि मैं पीछे स्पष्ट कर चुका हूं कि इस चन्द्र पर्वत की वजह से गैस्टिक ट्रबल, अपच, अजीर्ण आदि की शिकायत थोड़े बहुत रूप में बनी रहेगी । और आपके जीवन में जो मानसिक परेशानियां बराबर बनी रही हैं उनका मूल कारण भी यह चन्द्र पर्वत ही है । इसके लिये मैं उपाय पीछे स्पष्ट कर चुका हूं । हाथ में राहू पर्वत दबा हुआ है जो कि अपने आप में अनुकूल ही है । इससे आपके मन में न तो कभी अधार्मिक और अनैतिक भावना आई है और न आगे के जीवन में ऐसा संभव ही है । एक दृष्टि से इस पर्वत का दबा हुआ रहना आपकी धार्मिक भावनाओं को ऊंचा उठाने में सहायक रहा है । मणिबन्ध आपके अनुकूल है । पहला मणिबन्ध अंजीरवत् है जो कि शुभ परि- णामों को देने वाला है साथ ही आपके हाथ के तीन मणिबन्ध आपको दीर्घायु बनाने में भी सहायक हैं । जहां तक शुक्र पर्वत का प्रश्न है वह अनुकूल है। और जीवन रेखा ने धनुष- वत् अपने आपको बनाकर शुक्र पर्वत का विस्तार ही किया है। इस पर जो बाधक