भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 4, कुल 350 में से

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पृष्ठ 4

भूमिका कराग्रे वसते लक्ष्मी कर मध्ये सरस्वती । कर पृष्ठे स्थितोब्रह्मा प्रभाते कर दर्शनम् ॥ ये दो पंक्तियां ही हाथ का महत्त्व सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं, हमारा हाथ एक सामान्य हाथ ही नहीं है, अपितु धार्मिक आध्यात्मिक दृष्टि से इसमें सभी देवताओं का निवास है, भौतिक दृष्टि से मानव की ओजस्विता और कार्य-शक्ति का पुंज है और ज्योतिष की दृष्टि से सम्पूर्ण जीवन की हलचल का स्रोत है। हमारा जीवन वेगमय है, निरन्तर सक्रिय है, और पल-पल परिवर्तनशील है, और इस सारे परिवर्तन का, जीवन के संघर्षों का, तथा मानव के घात-प्रतिघातों का यह सम्पूर्ण रूप से प्रतिबिम्ब है, जिसके माध्यम से भूत को जानकर विश्वास करते हैं, वर्तमान को समझते हैं और भविष्य को पहचान कर उसके अनुसार अपने-आप को ढालने का प्रयत्न करते हैं जिसकी वजह से हम स्थिर वेगमय रह सकें। जोरों का तूफ़ान चल रहा है और हमें इस तूफ़ान में ही कदम बढ़ाने हैं, परन्तु यदि तूफ़ान-आंधी सामने आ रही है, तो हमें एक-एक पग उठाने में तकलीफ़ होगी, पर यदि तूफ़ान पीठ की ओर से आ रहा है, तो हमें वह तूफ़ान सहायता देगा, हमारे पैर आसानी से उठेंगे, हम सुविधा से गतिशील होकर सुगमतापूर्वक अपने गन्तव्य स्थल तक पहुंच सकेंगे । इस संसार में भी निरन्तर घात-प्रतिघात, संघर्ष-कशमकश का तूफ़ान चल रहा है, और हमें इस तूफ़ान में ही अपनी मंज़िल तक पहुंचना है। हस्तरेखा शास्त्र यह जानकारी देने के लिए आपका सहायक हो सकता है कि तूफ़ान का वेग किस ओर से है ? आप कौन सा रास्ता चुनें, जिससे तूफ़ान आप की पीठ की ओर से बहे और आप सुविधापूर्वक अपने गन्तव्य स्थल तक पहुंच सकें । हमारे सम्पूर्ण जीवन की छोटी से छोटी घटना हथेली में अंकित है, हथेली पर पाई जाने वाली सूक्ष्म से सूक्ष्म रेखा का भी अपने-आप में महत्त्व है। कोई भी रेखा व्यर्थ नहीं है, किसी भी रेखा का अस्तित्व निरर्थक नहीं है, आवश्यकता है ऐसे हस्तरेखा-शास्त्री की, जो इन रेखाओं को पढ सके, छोटी से छोटी रेखा के महत्त्व को समझ सके और उसे स्पष्ट कर सके । वस्तुतः भविष्य-कथन हमारे युग की सर्वोच्च उपलब्धि है, क्योंकि जितना संघर्ष आज के युग में है, उतना पहले कभी नहीं रहा, और हस्तरेखा विज्ञान ने जितनी प्रगति इस युग में की है, उतनी पहले कभी नहीं हुई। अमेरिका, यूरोप, फ्रांस, जापान आदि उन्नत देशों में इससे संबंधित वैज्ञानिक परीक्षण हुए हैं तथा वहां के विश्व विद्यालयों में इस विज्ञान को प्राथमिकता दी जाने लगी है। चिकित्सा क्षेत्र, तथा भविष्य-कथन के क्षेत्र में तो इसकी उपयोगिता निर्विवाद है । इस कशमकश के युग में हम इस विज्ञान के माध्यम से अपने भावी जीवन को समझ सकते हैं, आने वाले समय के संघर्षों से परिचित हो सकते हैं, और उनको ध्यान में रखते हुए हम भावी जीवन की योजना बना सकते हैं। उसके अनुसार अपने-आप