भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 350 में से

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( ४४ ) एक कमजोरी यह होती है कि ये अपनी उचित और अनुचित सभी बातों को तर्क शक्ति के सहारे मनवाने की कोशिश करते हैं। यदि कभी तर्क-शक्ति में अपना पलड़ा कमजोर होता देखते हैं तो हो-हल्ला मचाकर अपनी विजयसिद्ध करने का प्रयत्न करते हैं। सभ्य समाज में इनको ज्यादा आदर नहीं मिलता अपितु इन्हें बकवादी और वाचाल कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति के हाथ में यह पोरुआ पतला हो तो ऐसे व्यक्ति अपने दिमाग से काम न लेकर जो भी जी में आता है मुंह पर बक देते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने अधिकारियों की गलती निकालने में तत्पर रहते हैं। इनका जीवन भारवत् ही होता है। यदि पहला और दूसरा पोरुआ बराबर लम्बाई और चौड़ाई तथा मोटाई लिये हुए हों तो व्यक्ति शान्त मस्तिष्क के कहे जाते हैं न तो ये क्षणिक आवेश में क्रोधित होते हैं और न क्षणिक प्रशंसा से फूलते ही हैं। जीवन में प्रत्येक कदम साव- धानी के साथ उठाते हैं जिससे इनको समाज में कम-से-कम धोखा खाने को मिलता है। इनमें आत्म-विश्वास भी प्रबल रूप में होता है। सही शब्दों में कहा जाय तो ये व्यक्ति सभ्य, ऊंचे स्तर के व्यापारी, महत्त्वपूर्ण पदों पर अधिकारी और माने हुए कलाकार होते हैं। यदि पहले पोरुए की अपेक्षा दूसरा पोरुआ कमजोर, पतला और दुर्बल हो तो ऐसे व्यक्ति अपनी इच्छा से न चलकर दूसरों की अधीनता में ही चलना पसन्द करते हैं। सही रूप में यें स्वयं कोई निर्णय नहीं लेते। जीवन में ये किसी भी प्रकार का कोई कार्य बिना योजना के ही प्रारम्भ कर देते हैं, जिससे उस कार्य के अन्त में इन्हें हमेशा असफलता ही मिलती है। इनकी आत्मा निर्बल होती है। इनके विचार अस्थिर होते हैं। इनकी प्रवृत्ति झगड़ालू होती है और जीवन में ये एक असफल व्यक्ति कहे जाते हैं। वास्तव में ही ऐसे व्यक्ति भाग्यवादी होने के साथ-साथ आलसी भी कहे जाते हैं। तीसरा भाग : अंगूठे का तीसरा भाग पोरुआ न कहलाकर शुक्र का स्थान कहलाता है। शुक्र पर्वत के बारे में आगे विवेचन किया जायगा। प्रथम दो पोरुओं की अपेक्षा यह भाग निश्चय ही उन्नत, सुदृढ़ एवं सुन्दर होता है। यदि यह भाग सामान्य रूप से अधिक ऊंचा उठा हुआ, सुन्दर और किञ्चित् गुलाबी आभा लिये हुए होता है तो ऐसा व्यक्ति प्रेम और स्नेह के क्षेत्र में काफी बढ़ा-चढ़ा होता है। समाज में ऐसे व्यक्ति आदर प्राप्त करते हैं तथा मित्रों में भरपूर लोकप्रियता अर्जित करने में सफल होते हैं। ये व्यक्ति कठिनाइयों में भी मुस्कराते रहते हैं और अपने प्रयत्नों से जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करके ही रहते हैं।