भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ४३ ) रहता है। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में कई-बार बदनाम होते हैं। मेरी राय में ऐसे व्यक्तियों से समाज को किसी प्रकार का कोई विशेष लाभ नहीं मिलता। अंगूठे के तीन भाग : ध्यानपूर्वक देखने से प्रतीत होता है कि अंगूठा मुख्यतः तीन भागों में बंटा हुआ होता है। पहला वह भाग कहलाता है, जो नाखून से चिपका हुआ होता है। दूसरा मध्य भाग तथा तीसरा वह भाग कहलाता है, जो हथेली में शुक्र पर्वत से जुड़ा हुआ होता है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार इनमें प्रथम पोरुआ 'सत', दूसरा 'रज' तथा तीसरा 'तम' को स्पष्ट करता है। इनको हम ऊर्ध्व भाग, मध्यम भाग तथा अधो भाग के नाम से भी सम्बोधित कर सकते हैं। ऊर्ध्व भाग विज्ञान और इच्छा शक्ति का द्योतक होता है। मध्य भाग तर्क एवं विचार का प्रतिनिधित्व करता है तथा तीसरा अधो भाग प्रेम, विराग और स्नेह को सूचित करता है। प्रथम पोरुआ : जिस मनुष्य के अंगूठे का प्रथम पोरुआ दूसरे पोरुए से लम्बा हो, उस व्यक्ति में इच्छा-शक्ति प्रबल होती है तथा निर्णय लेने में यह स्वतन्त्र होता है। ऐसे व्यक्ति किसी की अधीनता में रह कर कार्य नहीं कर पाते। ऐसे व्यक्ति धार्मिक विचारों में गहरी आस्था रखने वाले होते हैं तथा इनका स्वयं का व्यक्तित्व इतना प्रबल तथा आकर्षक होता है कि देखते ही इनके व्यक्तित्व का प्रभाव सामने वाले पर पड़ जाता है। ये अपने व्यक्तित्व के बल पर कुछ भी कार्य सम्पन्न करा लेने में समर्थ होते हैं। ऐसे व्यक्ति यौवनावस्था की अपेक्षा वृद्धावस्था में अधिक संवेदनशील तथा अधिक सुखी देखे जाते हैं। यदि प्रथम तथा द्वितीय पोरुआ बराबर लम्बा एवं मोटा होता है तो ऐसा व्यक्ति समाज में सम्माननीय स्थान प्राप्त करने में सफल होता है। न तो ये किसी को धोखा देते हैं और न किसी से ये व्यक्ति सहज में ही धोखा खाते हैं। जीवन में मित्रों की संख्या बहुत ज्यादा होती है तथा समाज में ऐसे व्यक्ति लोकप्रिय होते हैं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी इन्हें मुस्कराते हुए देखा जा सकता है। द्वितीय पोरुआ : अंगूठे का दूसरा पोरुआ तर्क-शक्ति का स्थान माना गया है। यदि दूसरा पोरुआ पहले पोरुए से बड़ा और मजबूत हो तो इससे यह सिद्ध होता है कि व्यक्ति में तर्क-शक्ति जरूरत से ज्यादा है और इस व्यक्ति की यह विशेषता होगी कि यह अपनी तर्क शक्ति के सामने किसी को भी टिकने नहीं देगा। परन्तु इस प्रकार के व्यक्तियों