भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 350 में से

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( ४२ ) २. समकोण अंगूठा :- ऐसे अंगूठे वे कहे जाते हैं, जो तर्जनी से जुड़ते समय समकोण का निर्माण करते हैं । ये अंगूठे देखने में सुन्दर, मजबूत तथा स्तम्भ की तरह प्रतीत होते हैं परन्तु ऐसे अंगूठे पीछे की तरफ झुके हुए नहीं होते । इन अंगूठों को ध्यानपूर्वक देखने से पता चलता है कि ये व्यक्ति बातों की अपेक्षा कार्य एवं परिश्रम पर ज्यादा विश्वास करते हैं । यद्यपि इनमें क्रोध की मात्रा विशेष होती है परन्तु यह भी देखा गया है कि इनके जीवन में जितनी तेजी से गुस्सा आता है उतनी ही तेजी से गुस्सा उतर भी जाता है । यह बात सही है कि क्रोध के समय ये चुपचाप बैठे रहते हैं, अहित या अनिष्ट नहीं करते । अपनी बात पर ये पूरी तरह से अड़े रहते हैं । कई बार गलत बातों पर या गलत कार्यों पर ही दृढ़ता का रुख ले लेते हैं, जिसकी वजह से कुछ नई समस्याएं भी पैदा हो जाती हैं । प्रतिशोध की भावना इनमें इतनी अधिक होती है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी भी ये अपने बैर को भूलते नहीं । ऐसे व्यक्ति या तो अच्छे मित्र हो सकते हैं या अच्छे शत्रु । ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में टूट सकते हैं परन्तु झुकना इनके बस की बात नहीं होती । सही रूप में देखा जाए तो ऐसे ही व्यक्ति देश-भक्त, देश तथा समाज के कार्यों पर अपने प्राणों को उत्सर्ग करने वाले एवं दृढ़-निश्चयी होते हैं । मन में एक बार ये व्यक्ति जो निश्चय कर लेते हैं, उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं । दूसरों के अधीन रहकर कार्य करना इनको प्रिय नहीं होता, अपितु ये अपने ही द्वारा संचालित होते हैं । ३. न्यूनकोण अंगूठा : हथेली से जुड़ते समय तर्जनी उंगली के साथ जो अंगूठे न्यूनकोण का आकार बनाते हैं, वे इसी वर्ग के अन्तर्गत आते हैं। इन अंगूठों की लम्बाई अपेक्षाकृत कम होती है तथा देखने में ये अंगूठे बेडौल से प्रतीत होते हैं । ऐसे अंगूठों को तमोगुणी अंगूठा कहा जाता है । जिन व्यक्तियों के हाथों में इस प्रकार का अंगूठा होता है, वे व्यक्ति जीवन में निराशावादी भावना बनाये रखते हैं। आलस्य इनके जीवन में बराबर बना रहता है । यात्रा आदि कार्यों में इनकी रुचि नहीं होती और न किसी कार्य की पूर्णतः में ये विश्वास रखते हैं । निम्न और मध्य वर्ग के लोगों में ऐसे ही अंगूठे प्रायः देखने को मिलते हैं । ऐसे व्यक्ति बुरी आदतों तथा व्यसनों में व्यस्त रहते हैं, जिसकी वजह से आय की अपेक्षा इनका व्यय बढ़ा-चढ़ा रहता है । ये जरूरत से ज्यादा फिजूलखर्ची होते हैं तथा दिवास्वप्न देखते-देखते अपनी उम्र काट लेते है। धर्म-कर्म में उनकी रुचि कम ही होती है । भूत-प्रेत, देवी-देवताओं आदि की ओर इनका थोड़ा-बहुत झुकाव रहता है । निम्नस्तरीय कार्यों में इन्हें आनन्द आता है । इस प्रकार के व्यक्ति भोगी होते हैं तथा अन्य स्त्रियों के प्रति बराबर आसक्ति बनाए रखते हैं । अपने से निम्नतर अथवा निम्न जाति की स्त्रियों से इनका सम्पर्क