बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५१ ) गया है अतः केवल मात्र अंगूठे को देखकर ही मानव का स्वभाव उसकी प्रकृति तथा उसके विचारों का अध्ययन किया जा सकता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार यदि चारों उंगलियां कट जाती हैं तब भी कोई हानि नहीं होती परन्तु किसी कारणवश अंगूठा कट जाय और रक्त प्रवाह जोरों से होने लग जाय तो व्यक्ति पागल हो जाता है और कई बार मृत्यु भी हो जाती है। इस छोटे से तथ्य से ही अंगूठे का महत्व समझा जा सकता है। परिस्थितियों तथा विभिन्न जलवायु को ध्यान में रखते हुए समस्त मानव जाति के अंगूठे तीन भागों में बांटे जा सकते हैं। १. वे अंगूठे जो हथेली पर तर्जनी के साथ मिलकर अधिक कोण का निर्माण करते हैं। २. वे अंगूठे जो तर्जनी के साथ मिलकर समकोण का निर्माण करते हैं। ३. वे अंगूठे जो हथेली पर तर्जनी के साथ न्यूनकोण का निर्माण करते हैं। पाठकों की सुविधा के लिए इन तीनों ही प्रकार के अंगूठों का संक्षिप्त विवरण स्पष्ट कर रहा हूं : १. अधिक कोण अंगूठा :-ये अंगूठे देखने में सुन्दर आकृति वाले, लम्बे तथा पतले होते हैं। ऐसे अंगूठों को सात्विक अंगूठा कहा जाता है। जिन व्यक्तियों के हाथों में ऐसा अंगूठा होता है, वे व्यक्ति कोमल और मधुर स्वभाव वाले, कलाकार, संगीतज्ञ तथा समाज में रचनात्मक कार्य करने वाले होते हैं। यद्यपि ऐसे लोगों का बचपन बहुत अधिक संघर्षों के साथ व्यतीत होता है परन्तु फिर भी ये अपने प्रयत्नों से घरेलू परि- स्थितियों को अपने अनुकूल बना कर ऊंचा उठ जाते हैं। यद्यपि निरन्तर इनके मार्ग में बार-बार बाधाएं आती हैं परन्तु ये अपनी इच्छा-शक्ति के बल पर ही जीवन में सफल होते हैं। इस प्रकार के हाथ में अत्यधिक लम्बा अंगूठा अशुभ माना गया है। यदि अंगूठे की लम्बाई तर्जनी के दूसरे पोरुए के आधे भाग से भी ऊपर बढ़ जाय तो वह व्यक्ति मूर्ख होता है तथा अपने जीवन में सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। यदि अंगूठे की लम्बाई समान एवं उचित अनुपात में होती है तो व्यक्ति बुद्धिमान, चतुर तथा कला प्रेमी होता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में स्वार्थ की अपेक्षा मानव-सेवा एवं समाज-सेवा को प्राथमिकता देता है। यद्यपि इनके जीवन में मित्रों की संख्या कम ही होती है परन्तु फिर भी जितने भी मित्र होते हैं, वे विपत्ति पड़ने पर सहायता करने वाले होते हैं। इनके चित्त में अस्थिरता बनी रहती है। ऐसे व्यक्ति बार-बार अपने विचार बदलते रहते हैं और जीवन में काफी बाधाओं के बाद ही सफल हो पाते हैं।