भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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ऐसा व्यक्ति सेक्रेटरी अथवा आई० ए० एस० अधिकारी होता है। इन लोगों को आकस्मिक रूप से धन लाभ होता है तथा जीवन का उत्तरार्द्ध अत्यन्त सफलता के साथ व्यतीत होता है। यदि यह उंगली असाधारण रूप से लम्बी दिखाई दे तो ऐसे व्यक्ति बुद्धिजीवी होते हैं तथा उनमें दूसरों को प्रभावित करने की विशेष क्षमता होती है। यदि यह उंगली बहुत अधिक छोटी हो तो वह व्यक्ति बात के मर्म को बहुत जल्दी समझ जाता है और तुरन्त निर्णय लेने में समर्थ रहता है। यदि इसका आगे का सिरा नुकीला हो तो ऐसे व्यक्ति बुद्धिमान, सूक्ष्म दृष्टि सम्पन्न तथा वाकपटु होते हैं। यदि आगे का भाग वर्गाकार हो तो ऐसे व्यक्ति में तर्क करने की विशेष क्षमता होती है तथा ये अपने भाषणों के माध्यम से लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। यदि ऊपरी भाग चपटा हो तो वैज्ञानिक अथवा मशीनरी सम्बन्धी कार्यों में रुचि लेने वाला होता है। यदि उस उंगली का पहला पर्व लम्बा हो तो वह व्यक्ति विज्ञान में सफलता प्राप्त करता है। यदि दूसरा पर्व लम्बा हो तो वह परिश्रम के माध्यम से व्यापार में विशेष सफलता अर्जित करता है। यदि इसका तीसरा पर्व लम्बा हो तो ऐसा व्यक्ति चतुर होता है परन्तु उसमें असत्य बोलने की भावना जरूरत से ज्यादा होती है। यदि यह उंगली अनामिका के बराबर लम्बी हो तो ऐसा व्यक्ति ऊंचे स्तर का दार्शनिक तथा बुद्धिमान होता है। यदि यह उंगली मध्यमा के बराबर लम्बी दिखाई दे तो वह व्यक्ति अपने कार्यों से विश्वविख्यात होता है। वास्तव में अनामिका उंगली जितनी ही ज्यादा लम्बी होती है, उतना ही ज्यादा शुभ कहा जाता है।

उंगलियों की दूरी : दो उंगलियों का खाली स्थान भी अपनेआप में महत्व रखता है। यदि अंगूठे और तर्जनी के बीच अधिक दूरी हो तो उस व्यक्ति में मानवीय गुण भरपूर होते हैं तथा उनमें प्रेम, दया, क्षमा आदि मानवोचित गुण सहज, स्वाभाविक रूप से प्राप्त होते हैं। यदि तर्जनी और मध्यमा उंगली के बीच खाली जगह दिखाई दे तो वह व्यक्ति अपने विचारों में स्वतन्त्र होता है तथा अपनी बात को किसी के भी सामने कहने में हिचकिचाता नहीं। मध्यमा और अनामिका उंगली के बीच का खाली स्थान व्यक्ति की लापरवाही और असभ्यता प्रदर्शित करता है। इसी प्रकार अनामिका और कनिष्ठिका के बीच खाली स्थान हो तो ऐसा व्यक्ति हत्यारा एवं निर्दयी होता है।

उंगलियों के अग्र भाग : उंगलियों के अग्रभाग भी भविष्य-कथन में बहुत ज्यादा महत्व रखते हैं। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार ये अग्र भाग चार प्रकार के होते हैं।