बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४६ ) चौर्य जुआं, सट्टा आदि गलत कार्यों में लगा देते हैं। ऐसे व्यक्तियों को असभ्य और निर्दयी कहा जाना चाहिए । यदि अनामिका उंगली का झुकाव सबसे छोटी उंगली की ओर हो तो व्यक्ति व्यापार से विशेष लाभ उठाता है और उसका सारा जीवन व्यापारिक कार्यों में ही व्यतीत होता है। परन्तु यदि इस उंगली का झुकाव मध्यमा की तरफ हो तो ऐसा व्यक्ति चिन्तन-प्रधान व आत्म-केन्द्रित होता है तथा जीवन में कुछ ऐसा कार्य करके जाता है, जिससे आगे के जीवन में समाज और देश उसको याद रख सकें । यदि अनामिका छोटी हो तो वह व्यक्ति कलाकृतियों अथवा चित्रों एवं पुरानी वस्तुओं से धन-संचय करता है। यदि इसका अगला सिरा नुकीला हो तो वह एक सफल संगीतज्ञ अथवा चित्रकार होता है। यदि अगला भाग वर्गाकार हो तो कला के माध्यम से धन एवं यश दोनों ही कमाता है। यदि ऊपरी भाग चपटा हो तो इतिहास से संबंध- धित कार्यों में वह विशेष रुचि लेता है तथा उसमें सफलता भी प्राप्त करता है। यदि इस उंगली का पहला पर्व लम्बा हो तो इसमें कलात्मक रुचि विशेष रूप से होती है। यदि दूसरा पर्व लम्बा हो तो अपनी प्रतिभा के बल पर यह व्यक्ति बहुत ऊंचे स्तर तक उठ सकता है। यदि तीसरा पर्व लम्बा तथा चौड़ा हो तो अपने जीवन में यह राष्ट्र-व्यापी सम्मान अर्जित करता है। यदि यह उंगली तर्जनी के बराबर लम्बी हो तो उसे विशेष ख्याति की भूख बनी रहती है। यदि यह उंगली मध्यमा के बराबर लम्बी हो तो इसके जीवन में कई कार्य आकस्मिक रूप से गठित होते हैं और अन्त में यह सफलता प्राप्त करके ही रहता है। कनिष्ठिका उंगली : अंग्रेजी में इस उंगली को 'फिंगर आफ मरकरी' अथवा 'लिटल फिंगर' कहते हैं। इसके मूल में बुध पर्वत का स्थान माना गया है। प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में यह सभी उंगलियों से छोटी होती है। यदि यह उंगली अनामिका के नाखून तक पहुंच जाए तो वह व्यक्ति जीवन में अत्यन्त उच्चस्तरीय सफलता प्राप्त करता है तथा महत्त्वपूर्ण पद पर आसीन होता है। यह उंगली जितनी ही ज्यादा लम्बी होती है उतनी ही ज्यादा शुभ मानी गई है। ऐसी उंगली रखने वाले व्यक्ति सफल प्रशासक एवं सफल साहित्यकार कहे जाते हैं। यदि यह उंगली अनामिका के ऊपरी पोर के अर्द्ध भाग से भी आगे बढ़ जाती है तो