बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६४ ) मध्यमा उंगली को 'भाग्य की देवी' कहा जाता है, क्योंकि भाग्य रेखा या 'फैट लाइन' की समाप्ति इसी उंगली के मूल में होती है। यदि शनि ग्रह पूर्णविकसित होता है तो व्यक्ति प्रबल भाग्यवान होता है तथा जीवन में अपने प्रयत्नों से बहुत अधिक ऊंचा उठता है। विकसित पर्वत होने पर ऐसा व्यक्ति एकान्त-प्रिय तथा निरन्तर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने वाला होता है। वह अपने कार्यों में अथवा लक्ष्य में इतना अधिक डूब जाता है कि वह घर-गृहस्थी की चिंता ही नहीं करता। स्वभाव से ऐसे व्यक्ति चिड़चिड़े तथा सन्देहशील प्रवृत्ति के होते हैं। ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती जाती है, त्यों-त्यों ये व्यक्ति भी रहस्यवादी बन जाते हैं। शनि पर्वत प्रधान व्यक्ति, जादूगर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, साहित्यकार अथवा रसायनशास्त्री होते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण मितव्ययी होते हैं तथा अचल सम्पत्ति में ज्यादा विश्वास रखते हैं। संगीत, नृत्य आदि कार्यों में इनका रुझान कम रहता है। सन्देहशीलता इनके जीवन में बचपन से ही होती है और अपनी पत्नी तथा पुत्रों पर भी सन्देह की दृष्टि रखने से नहीं चूकते । यदि यह पर्वत अत्यधिक विकसित होता है तो व्यक्ति अपने जीवन में आत्म- हत्या कर लेता है। डाकू, ठग, लुटेरे आदि व्यक्तियों के हाथों में यह पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित होता है। ऐसे व्यक्तियों का पर्वत साधारणतः पीलापन लिये हुए होता है। इनकी हथेलियां तथा चमड़ी पीली होती हैं तथा इनके स्वभाव में चिड़चिड़ा- पन स्पष्टतः झलकता है। यदि शनि का पर्वत गुरु पर्वत की ओर झुका हुआ हो तो यह शुभ संकेत कहा जाता है। ऐसे व्यक्ति समाज में आदरणीय स्थान प्राप्त करते हैं तथा समाज में श्रेष्ठ रूप में देखे जाते हैं। परन्तु यदि शनि पर्वत का झुकाव सूर्य की ओर हो तो ऐसे व्यक्ति आलसी, निर्धन तथा भाग्य के भरोसे जीवित रहने वाले होते हैं। इनमें जरूरत से ज्यादा निराशा होती है तथा वे प्रत्येक कार्य का अन्धकार पक्ष ही देखते हैं। परिवार वालों से उनको विशेष लाभ नहीं मिल पाता, व्यापार में ये हानि उठाते हैं। यदि शनि पर्वत पर जरूरत से ज्यादा रेखाएं हों तो व्यक्ति कायर तथा अत्य- धिक भोगी होता है। यदि शनि पर्वत तथा बुध पर्वत दोनों ही विकसित हों तो वह व्यक्ति एक सफल वैद्य अथवा व्यापारी बनता है और उसके जीवन में आर्थिक दृष्टि से किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता । यदि हथेली में शनि पर्वत का अभाव होता है तो उस व्यक्ति का जीवन महत्त्व हीन-सा होता है। यदि यह पर्वत सामान्य रूप से उभरा हुआ हो तो वह व्यक्ति जरू- रत से ज्यादा भाग्य पर विश्वास करने वाला तथा अपने कार्यों में असफलता प्राप्त करने वाला होता है। ऐसे व्यक्तियों के जीवन में मित्रों की संख्या बहुत कम होती है। स्वभाव से ये हठी तथा अधार्मिक होते हैं।