भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 66, कुल 350 में से

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पृष्ठ 66

( ६५ ) यदि मध्यमा उंगली का सिरा नुकीला हो तथा शनि पर्वत विकसित हो तो व्यक्ति कल्पना-प्रिय होता है, परन्तु यदि उंगली का सिरा वर्गाकार हो तो वह व्यक्ति कृषि अथवा रसायन के क्षेत्र में विशेष उन्नति करता है । ३. सूर्य :-- अनामिका उंगली के मूल में तथा हृदय-रेखा के ऊपर का जो भाग होता है वह सूर्य पर्वत कहलाता है । ऐसा पर्वत व्यक्ति की सफलता का सूचक होता है। यदि हाथ में सूर्य पर्वत का अभाव हो तो व्यक्ति अत्यन्त साधारण जीवन व्यतीत करता है । इसलिये जिसके हाथ में सूर्य पर्वत नहीं होता वह एक प्रकार से गुमनाम जिन्दगी ही व्यतीत करता है । इस पर्वत का विकास मानव के लिए अत्यन्त आवश्यक है और इस पर्वत के विकास से मानव प्रतिभावान् और यशस्वी बनता है । यदि यह पर्वत पूर्ण उन्नत, विकसित तथा गुलाबीपन लिये हुए होता है तो वह व्यक्ति अपने जीवन में अत्यन्त ऊंचे पद पर पहुंचता है । ऐसा व्यक्ति स्वभाव से हंस-मुख तथा मित्रों में घुल-मिल कर काम करने वाला होता है। इनकी बातें और इनके कार्य समाचार बन जाते हैं तथा जनसाधारण में ये व्यक्ति अत्यन्त लोकप्रिय होते हैं। ऐसे व्यक्ति सफल कलाकार, श्रेष्ठ संगीतज्ञ, तथा यशस्वी चित्रकार होते हैं। इन लोगों में प्रतिभा जन्मजात होती है। एक दूसरे के व्यवहार में ये व्यक्ति ईमानदारी बरतते हैं तथा वैभवपूर्ण जीवन बिताने के ये इच्छुक होते हैं। सही रूप में देखा जाय तो ये व्यक्ति व्यापार में विशेष लाभ उठाते हैं तथा इनके जीवन में आय के स्रोत एक से अधिक होते हैं । ये पूर्ण रूप से भौतिक होते हैं तथा सामने वाले व्यक्ति के मन की थाह तक पहुंचने में अत्यन्त सक्षम होते हैं । अनपढ़ तथा सामान्य घराने के व्यक्ति की हथेली में भी यदि सूर्य पर्वत विकसित हो तो वह व्यक्ति श्रेष्ठ धनी और सम्पन्न होता है । आकस्मिक धन-प्राप्ति इनके जीवन में कई बार होती है तथा इनका रहन-सहन अत्यंत राजसी तथा वैभवपूर्ण होता है । हृदय से ये व्यक्ति साफ होते हैं तथा अपनी गलती को स्वीकार करने में भी हिचकिचाते नहीं । सुलझे हुए मस्तिष्क के धनी ये अपना विरोध सहन नहीं कर पाते तथा खरी-खरी बात सामने वाले के मुंह पर कह देने में विश्वास रखते हैं। ऐसे व्यक्ति ही जीवन में महत्त्वपूर्ण पदों पर पहुंच सकते हैं तथा कुछ नया कार्य करके दिखा सकते हैं । यदि हथेली में सूर्य पर्वत नहीं होता तो ऐसा व्यक्ति मन्द-बुद्धि तथा मूर्ख होता है । यदि यह पर्वत कम विकसित होता है तो उस व्यक्ति में सौंदर्य के प्रति रुचि तो होती है परन्तु वे उसमें पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाते । अत्यन्त श्रेष्ठ तथा सुवि- कसित सूर्य पर्वत आत्म-विश्वास, सज्जनता, दया, उदारता, तथा धन-वैभव, का सूचक

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