भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 71, कुल 350 में से

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पृष्ठ 71

( ७० ) जिन हाथों में मंगल पर्वत बलवान होता है, वे कायर या दब्बू नहीं होते । ऐसे व्यक्तियों के जीवन में दृढ़ता और सन्तुलन होता है । अगर हथेली में मंगल पर्वत का अभाव होता है तो उस व्यक्ति को कायर समझ लेना चाहिये । मंगल पर्वत प्रधान व्यक्ति हृष्टपुष्ट तथा पूरी लम्बाई लिये हुये होते हैं। धीरजता तथा साहस इनका प्रधान गुण होता है । जीवन में ये अन्याय तो रत्ती-भर भी सहन नहीं करते । ऐसे व्यक्ति पुलिस विभाग में या मिलिट्री में अत्यन्त ऊंचे पद पर पहुंचते हैं । शासन करने का इनमें जन्मजात गुण होता है तथा ऐसे ही व्यक्ति समाज में नेतृत्व करने में सक्षम होते हैं । यदि मंगल पर्वत बहुत ज्यादा विकसित हो तो वह व्यक्ति दुराचारी, अत्या- चारी तथा अपराधी होता है । समाज-विरोधी कार्यों में वह हमेशा आगे रहता है। उसका स्वभाव लड़ाकू होता है । अपने बात को जबरदस्ती से मनवाने का यह आदी होता है । ऐसे व्यक्ति बात-बात पर लड़ने वाले, अपने अधिकारों के लिए सब कुछ बलिदान करने वाले, लम्पट तथा धूर्त होते हैं । यदि मंगल पर्वत का झुकाव शुक्र क्षेत्र की ओर होता है तो यह बात निश्चित समझनी चाहिए कि उस व्यक्ति में सद्गुणों की अपेक्षा दुर्गुण विशेष होंगे । यही नहीं अपितु प्रत्येक आवेग की तीव्रता होगी । ऐसे व्यक्ति यदि शत्रुता रखेंगे तो भयंकर शत्रु होंगे और यदि मित्रता का व्यवहार करेंगे तो अपना सब कुछ बलिदान करने के लिए तैयार रहेंगे । ऐसे व्यक्ति झूठी शान-शौकत, व्यर्थ का आडंबर तथा प्रदर्शन-प्रिय होते हैं । यद्यपि ये स्वयं डरपोक होते हैं परन्तु दूसरों को गीदड़ धमकी देकर काम निकालने में माहिर होते हैं । सही रूप में देखा जाय तो ऐसे व्यक्ति रूखे 'कर्कश एवं कठोर' होते हैं। यदि मंगल पर्वत पर रेखाएं विशेष रूप से दिखाई दें तो यह समझ लेना चाहिए कि ऐसा व्यक्ति युद्ध-प्रिय होता है । आगे चलकर इस प्रकार का व्यक्ति या तो सेनाध्यक्ष बनता है अथवा भयंकर डाकू बन जाता है । जोश दिलाने पर ये सब कुछ बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं । मंगल पर्वत पर त्रिकोण, चतुर्भुज या किसी प्रकार के बिन्दु शुभ नहीं कहे जाते । ऐसे चिह्न व्यक्ति के रोग को स्पष्ट करते हैं और रक्त से सम्बन्धित बीमारी उनके जीवन में बराबर बनी रहती है । यदि मंगल पर्वत भली प्रकार से विकसित हो तथा साथ ही हथेली का रंग भी लालिमा लिये हुए हो तो वह व्यक्ति निश्चय ही ऊंचा पद प्राप्त करता है । अपने जीवन में वह संघर्षों एवं बाधाओं की परवाह न कर के अपने लक्ष्य तक पहुंच जाने में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है । पीला रंग व्यक्ति को अपराध भावना की ओर प्रवृत्त करता है। यदि हथेली का रंग सामान्य नीलापन लिये हुए हो तो ऐसा व्यक्ति गठिया का रोगी होता है ।