बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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पूरी तरह से हुआ हो परन्तु उसकी मस्तिष्क रेखा सन्तुलित न हो तो वह व्यक्ति प्रेम तथा भोग के क्षेत्र में बदनामी प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्तियों का प्रेम वासना-प्रधान ही कहा जा सकता है । शुक्र पर्वत का उभार व्यक्ति को तेजस्वी और लावण्यमान बना देता है। इसके चेहरे में कुछ ऐसा आकर्षण होता है, जिसकी वजह से लोग बरबस उसकी ओर आकृष्ट रहते हैं। मुसीबतों को भी ये व्यक्ति हंसते-हंसते सहन करते हैं तथा अपने कार्यों एवं कर्त्तव्यों के प्रति पूर्णतः जागरूक रहते हैं। सुन्दर एवं कलात्मक वस्तुओं के प्रति इनका रुझान स्वाभाविक ही होता है। यदि हथेली खुरदरी हो तथा उस पर शुक्र पर्वत बहुत ज्यादा विकसित हो तो वह व्यक्ति भोगी तथा ऐयाशी किस्म का होता है। ऐसे व्यक्ति भौतिक सुखों के दास होते हैं परन्तु यदि हथेली चिकनी एवं मुलायम हो तथा उस पर शुक्र पर्वत पूर्णतः विकसित हो तो ऐसे व्यक्ति एक सफल प्रेमी तथा उत्कृष्ट कोटि के कवि होते हैं। शुक्र पर्वत की अनुपस्थिति व्यक्ति के जीवन में दुख तथा परेशानियां भर देती है। यदि शुक्र पर्वत सामान्य रूप से विकसित हो तो वह व्यक्ति सुन्दर, शुद्ध प्रेम भाव रखने वाला तथा संवेदनशील होता है। यदि शुक्र पर्वत मंगल की ओर झुका हुआ हो तो वह प्रेम के क्षेत्र में कोमलता नहीं बरतता । उनके जीव में बलात्कार की घटनाएं जरूरत से ज्यादा होती हैं। शुक्र प्रधान व्यक्तियों को गले का रोग विशेष रूप से रहता है। ऐसे व्यक्ति ईश्वर पर आस्था नहीं रखते । इनके जीवन में मित्रों की संख्या बहुत अधिक होती है तथा ये अपने जीवन में प्रेम और सौन्दर्य को ही अपना सब-कुछ समझते हैं। यदि अंगूठे का सिरा कोणदार हो तथा शुक्र पर्वत विकसित हो तो वह व्यक्ति कलात्मक रुचि वाला होता है। यदि अंगूठे का सिरा वर्गाकार हो तो ऐसा व्यक्ति समझदार और तर्क से काम लेने वाला माना जाता है, फैला हुआ सिरा व्यक्ति में दयालुता की भावना भर देता है। वस्तुतः शुक्र प्रधान व्यक्ति ही इस सुन्दर दुनिया को अच्छी तरह से पहचान सकते हैं और उसका आनन्द उठा सकते हैं । ६. मंगल :-- हथेली में दो मंगल होते हैं, जिन्हें उन्नत मंगल तथा अवनत मंगल कहा जाता है। जीवन रेखा के प्रारम्भिक स्थान के नीचे और उससे घिरा हुआ शुक्र पर्वत के ऊपर जो फैला हुआ भाग है वही मंगल पर्वत कहलाता है। मूल रूप से यह पर्वत युद्ध का प्रतीक माना जाता है। मंगल प्रधान व्यक्ति साहसी, निडर तथा शक्तिशाली, होते हैं।