भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ६८ ) प्रसिद्धि पाते देखे गये हैं। यात्राओं के ये शौकीन होते हैं तथा घूमना इनकी प्रिय हॉबी होती है। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करते हैं। यदि बुध पर्वत जरूरत से ज्यादा उभरा हुआ होता है तो ऐसे व्यक्ति धन के पीछे पागल रहते हैं। और 'येन केन प्रकारेण' धन-संचय करना ही ये अपने जीवन का उद्देश्य मानते हैं। यदि बुध पर्वत सूर्य की ओर झुका हुआ हो तो ऐसे व्यक्ति जीवन में आसानी से पूर्ण सफलता प्राप्त कर लेते हैं। साहित्यकार व वैज्ञानिक आदि के हाथों में ऐसा ही बुध पर्वत देखा जाता है। यदि व्यक्ति के हाथ की हथेली लचीली हो तथा उस पर बुध पर्वत का पूरा उभार हो तो व्यक्ति अपने प्रयत्नों से लाखों रुपया इकट्ठा करता है। यदि हथेली पर बुध पर्वत का अभाव हो तो उसका जीवन दरिद्रता में ही व्यतीत होता है। यदि सामान्य रूप से बुध पर्वत विकसित हो तो आविष्कार तथा वैज्ञानिक कार्यों में उसकी रुचि होती है, यदि कनिष्ठिका उंगली का सिरा नुकीला हा तथा बुध पर्वत विकसित हो तो वह व्यक्ति वाक्पटु होता है। यदि सिरा वर्गाकार हों तो व्यक्ति में तर्क-बुद्धि की बाहुल्यता रहती है। चपटा सिरा भाषण-कला में विशेष दक्षता प्रदान करता है, यदि कनिष्ठिका उंगली छोटी हो तो व्यक्ति सूक्ष्म बुद्धि रखने वाला होता है। लम्बी उंगलियों के साथ विकसित बुध पर्वत हो तो वह व्यक्ति स्त्रियों के प्रति विशेष आसक्ति रखने वाला होता है। यदि यह उंगली गांठदार हो तो ऐसा व्यक्ति दृढ़संकल्प का धनी होता है। यदि हाथों की उंगलियां लम्बी और पीछे की ओर मुड़ी हुई हों तो ऐसा व्यक्ति धोखा देने में विशेष माहिर होता है। यदि बुध पर्वत हथेली के बाहर की तरफ झुका हुआ हो तो वह व्यापार के क्षेत्र में विशेष सफलता प्राप्त करता है। यदि बुध पर्वत अपने आप में पूर्णतः श्रेष्ठ एवं विक- सित हो तो ऐसा व्यक्ति जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकता है। ५. शुक्र :-अंगूठे के दूसरे पोरुए के नीचे तथा आयु-रेखा से जो घिरा हुआ स्थान होता है उसे हस्तरेखा विशेषज्ञ शुक्र पर्वत के नाम से सम्बोधित करते हैं। यूनान में शुक्र को 'सुन्दरता की देवी' कहा गया है। जिसके हाथ में शुक्र पर्वत श्रेष्ठ स्तर का होता है वह व्यक्ति सुन्दर तथा पूर्ण सभ्य होता है। ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य जरूरत से ज्यादा अच्छा होता है उसके व्यक्तित्व का प्रभाव सामने वाले व्यक्ति पर विशेष रूप से रहता है। ऐसे व्यक्ति में साहस और हिम्मत की कमी नहीं रहती। यदि किसी व्यक्ति के हाथ में यह पर्वत कम विकसित हो तो वह व्यक्ति कायर तथा दब्बू स्वभाव का होता है। जिन लोगों के हाथों में शुक्र पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित होता है, वे व्यक्ति भोगी तथा विपरीत सैक्स के प्रति लालायित रहते हैं। यदि किसी के हाथ में शुक्र पर्वत का अभाव होता है तो वह व्यक्ति वीतरागी, साधु तथा संन्यासी की तरह होता है। गृहस्थ जीवन में उसकी रुचि नहीं के बराबर होती है। यदि शुक्र का विकास