भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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रेखाएं जीवन शक्ति का स्फूर्तिमय वेग हथेली के माध्यम से ही सम्पन्न होता है । और यह वेग हथेली के माध्यम से रेखाओं और पर्वतों को एक ही सूत्र में ग्रंथित करता है। जैसा कि मैं पीछे कह चुका हूं कि हथेली पर अंकित कोई भी रेखा व्यर्थ नहीं होती क्योंकि हथेली पर छोटी या बड़ी, स्थूल या सूक्ष्म जो भी रेखा होती है वह इस जीवन शक्ति के वेग को प्रवाहित करने में सहायक होती है इसलिये हस्तरेखा विशेषज्ञ को चाहिए कि वह हथेली पर पाई जाने वाली प्रत्येक रेखा का सूक्ष्म अध्ययन करे । हथेली पर जो रेखाएं स्पष्ट गहरी एवं लंबी होती हैं वे सफलता की सूचक होती हैं इसके विपरीत टूटी हुई विरल और अस्पष्ट रेखाएं जीवनशक्ति में बाधक समझनी चाहिए। अतः स्पष्ट रेखाओं का प्रभाव ही मानव जीवन पर सही रूप में अंकित होता है। हस्तरेखा विशेषज्ञ को चाहिए कि वह सामने वाले व्यक्ति के दोनों हाथों का सूक्ष्मतापूर्वक अध्ययन करे। साथ ही वह छोटी से छोटी रेखा का भी अवलोकन करे, क्योंकि हाथ में पाई जाने वाली प्रत्येक रेखा का अपना महत्त्व होता है और वह रेखा किसी न किसी घटना को स्पष्ट करती ही है। रेखाओं द्वारा घटनाओं का समय भी ज्ञात किया जा सकता है। जितना ही ज्यादा व्यक्ति का अभ्यास होगा उतना ही ज्यादा वह उस समय को सही रूप में अंकित कर सकता है। हाथ का अध्ययन करने से पूर्व रेखाओं का सही सही परिचय ज्ञात कर लेना आवश्यक है । प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में सात मुख्य रेखाएं होती हैं तथा बारह गौण रेखाएं या सहायक रेखाएं अथवा प्रवाहित रेखाएं होती हैं। सात मुख्य रेखाएं निम्न- लिखित हैं — मुख्य रेखाएं : १. जीवन रेखा । २. मस्तिष्क रेखा । ३. हृदय रेखा । ४. सूर्य रेखा । ५. भाग्य रेखा ।