भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 97, कुल 350 में से

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(२६) जब तक यह शनि पर्वत पर नहीं पहुंच जाती तब तक इस रेखा को भाग्य रेखा कहना उचित नहीं । कई हाथों में यह रेखा बुध पर्वत पर भी पहुंच जाती है परन्तु वास्तव में यह रेखा भाग्य रेखा न होकर कोई अन्य रेखा ही होती है। इस रेखा का विकास हथेली में नीचे से ऊपर की ओर होता है। कुछ हाथों में यह रेखा शुक्र पर्वत से प्रारंभ होती है तो कुछ हाथों में यह रेखा मणिबन्ध से प्रारंभ होकर ऊपर की ओर उठती हुई दिखाई देती है। कुछ हाथों में यह रेखा सूर्य पर्वत के पास से भी निकल कर शनि पर्वत पर पहुंच जाती है। अतः जैसा कि मैंने ऊपर कहा कि इस रेखा का उद्गम अलग-अलग होता है अतः इसकी समाप्ति के स्थान से इसके उद्गम का पता लगाना चाहिए। संसार में आधे से अधिक लोगों के हाथों में यह रेखा नहीं पाई जाती । ६. स्वास्थ्य रेखा :-अंग्रेजी में इस रेखा को 'हेल्थ लाइन' कहते हैं । इस रेखा का सम्बन्ध स्वास्थ्य से होता है परन्तु इस रेखा के उद्गम का कोई निश्चित स्थान नहीं है। यह हथेली में मंगल पर्वत से, जीवन रेखा से, हथेली के बीच में से, या कहीं से भी प्रारम्भ हो सकती है, परन्तु यहां यह बात स्मरण रखनी चाहिए कि इस रेखा की समाप्ति बुध पर्वत पर ही होती है, और जो रेखा बुध पर्वत तक पहुंचती है वास्तव में वही रेखा स्वास्थ्य रेखा कहला सकती है। कुछ हाथों में यह रेखा बहुत स्वास्थ्य रेखा स्वास्थ्य रेखा मोटी होती है, तो कुछ हाथों में यह रेखा बाल से भी पतली देखी जा सकती है। इस रेखा का अध्ययन अत्यन्त सावधानी के साथ किया जाना चाहिए । इसके माध्यम से स्वास्थ्य, तन्दुरुस्ती, बीमारी आदि का अध्ययन होता है। ७. विवाह रेखा :-इसे अंग्रेजी में 'लव लाइन' या 'मैरिज लाइन' कहते हैं। यह बुध पर्वत पर होती है। हथेली के बाहरी भाग से बुध पर्वत की ओर अन्दर की

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