बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५७ ) तरफ आती हुई जो रेखा होती है वही विवाह रेखा कहलाती है। कुछ लोगों के हाथों में ऐसी तीन चार रेखाएं होती हैं, परन्तु इससे यह नहीं समझ लेना चाहिए कि उस विवाह रेखा विवाह रेखा व्यक्ति का विवाह तीन चार स्त्रियों से होगा, परन्तु इसका अर्थ यह होता है कि उसका सम्बन्ध तीन चार प्राणियों से अवश्य ही रहेगा। इन तीन चार रेखाओं में से जो रेखा गहरी और स्पष्ट होती है वास्तव में वही रेखा विवाह रेखा कहलाती है। कई बार यह भी देखने में आया है कि व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा होते हुए भी वह आजीवन कुंआरा रहता है। इसका कारण यह है कि जब विवाह रेखा पर किसी प्रकार का कोई क्रॉस बना हुआ हो तो यह समझ लेना चाहिए कि इस व्यक्ति के सम्बन्ध बन कर समाप्त हो जायेंगे। जीवन में विवाह नहीं हो सकेगा। यदि विवाह रेखा के साथ में चलने वाली किसी रेखा पर छोटे-छोटे चिह्न हों तो उस व्यक्ति के जीवन में अनैतिक सम्बन्ध बने रहते हैं। ऊपर मैंने सात प्रमुख रेखाओं की विवेचना की है अब आगे मैं गौण रेखाओं के बारे में जानकारी प्रस्तुत कर रहा हूं। १. बृहस्पति वलय :—इसे अंग्रेजी में 'रिंग आफ जुपिटर' कहते हैं। हिन्दी में इसको गुरुमुद्रा या गुरु रेखा भी कहते हैं। यह तर्जनी उंगली से नीचे बृहस्पति पर्वत पर तर्जनी उंगली के नीचे अर्द्ध चन्द्राकार बनाती हुई उसके पूरे क्षेत्र को घेर लेती है जो कि अंगूठी के समान दिखाई देती है इसी को गुरुवलय या वृहस्पति मुद्रा कहते हैं। बृहस्पतिवलय