भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ६८ ) २. मंगल रेखा :—इसे अंग्रेजी में 'लाइन आफ मार्स' कहते हैं। यह रेखा अंगूठे के पास जीवन रेखा के मूल उद्गम से निकल कर मंगल क्षेत्र पर होती हुई शुक्र पर्वत की ओर जाती है इसे मंगल रेखा कहते हैं परन्तु इसका उद्गम स्थान निश्चित नहीं होता । कुछ लोगों के हाथों में यह जीवन रेखा के बीच में से, तो कुछ हाथों में मंगल रेखा मंगल रेखा यह रेखा जीवन रेखा के बराबर चलती हुई भी दिखाई देती है। शुक्र क्षेत्र की ओर जब यह रेखा बढ़ती है तो वह जीवन रेखा से दूर हटती जाती है। हथेली में इस रेखा का महत्त्व बहुत अधिक माना गया है। ३. शनिवलय : इसे 'रिंग आफ सेटर्न' कहते हैं तथा हिन्दी में शनि मुद्रा या शनि रेखा या शनि वलय कहते हैं । यह रेखा मध्यमा उंगली के मूल में शनि पर्वत को घेरती हुई अपना एक छोर तर्जनी और मध्यमा के बीच में तो दूसरा छोर मध्यमा और अनामिका के बीच में रख देती है। इस प्रकार से यह शनि पर्वत को अंगूठी की तरह घेर लेती है। यह वलय हाथ में बहुत महत्व रखता है। शनिवलय