भारतकोश
याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary

महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished782 पृष्ठ

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( २६ ) आशा है विद्वज्जन इस नवीन संस्करण का यथोचित स्वागत कर चौखम्बा प्रकाशन के अध्यक्ष को प्रोत्साहित करेंगे जिससे ये इसी तरह संस्कृत तथा संस्कृतज्ञ की सेवा में सोत्साह तत्पर रह सकें। मति-मान्द्यादनुचिताः सम्भवन्ति पदे पदे ॥ तथापि ते नहि पदं लभन्ते महतां हृदि ॥ १ ॥ तुच्छोऽप्यवस्थातुमर्हः प्रकाशः सवितुर्मुखे ॥ अन्धं तमो महदपि न कदाचिदपीत्यलम् ॥ २ ॥ —श्री नारायणमिश्रः