याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary
महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविषयानुक्रम ( टीका में विवेचित महत्त्वपूर्ण विषयों का भी निर्देश इस विषयानुक्रम में किया गया है ) १. आचाराध्याय ( १ ) उपोद्घातप्रकरण मुनियों की जिज्ञासा - १ छः प्रकार का स्मार्त धर्म - २ धर्म के चौदह स्थान - ३ धर्मशास्त्रकार ऋषि - ” धर्म के कारक हेतु - ४ धर्म के ज्ञापक हेतु - ” देश आदि कारक हेतुओं का अपवाद - ५ हेतुविषयक सन्देह का निर्णय - ” ( २ ) ब्रह्मचारिप्रकरण वर्ण - ५ गर्भाधान आदि संस्कार - ६ संस्कार करने का फल - ७ स्त्रियों के संस्कार - ” उपनयन का समय - ” गुरु के धर्म - ” शौच के नियम - ८ प्राजापत्य आदि तीर्थ - ९ आचमन की विधि - ” प्राणायाम - १० सावित्रीजप की विधि - ” अग्निकार्य - ११ अभिवादन की विधि - ” अध्यापन के योग्य व्यक्ति - ” दण्ड इत्यादि का धारण - १२ भिक्षाचरण की विधि - ” भोजन का नियम - १३ ब्रह्मचारी के लिए निषिद्ध कर्म - १३ गुरु, आचार्य आदि के लक्षण - १४ उपाध्याय, ऋत्विक् के लक्षण - ” ब्रह्मचर्य की अवधि - ” उपनयन की समयसीमा - १५ द्विजत्व का कारण - ” वेदाध्ययन का फल - १६ काम्यब्रह्मयज्ञाध्ययन का फल - ” पञ्चमहायज्ञ का फल - १७ नैष्ठिक ब्रह्मचारी के धर्म - १८ ( ३ ) विवाहप्रकरण गुरुदक्षिणा के पूर्व का स्नान - १८ कन्या के लक्षण - २० सपिण्ड का विचार - २१ कन्यावरण का नियम - २२ कन्यादान में वर के नियम - ” द्विजातियों के लिए शूद्रा से विवाह का निषेध - २३ अनुलोमविवाह - ” आठ प्रकार के विवाह - २४ सवर्णा से विवाह में विशेषता - २५ कन्यादान देने वाले - ” कन्याहरण का दण्ड - २६ कन्या के दोष का गोपन - ” नियोग की विधि - २७ व्यभिचारिणी के लिए दण्ड - २८ स्त्रियों की पवित्रता - ” दूसरे विवाह के हेतु - २९