याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary
महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ३७ ) पतिव्रता की प्रशंसा ३० जीवनवृत्ति का चुनाव ५४ अधिवेत्ता के लिए दण्ड ,, श्रौतकर्म ५५ स्त्री के धर्म ,, यज्ञ के लिए हीनभिक्षा का निषेध ५६ शास्त्रानुसार दारसंग्रह का फल ३१ आर्थिक अवस्था का विचार ,, ऋतुकाल का समय ,, ( ६ ) स्नातकधर्मप्रकरण स्त्रीगमन के लिए निषिद्ध दिन ,, स्नातक के व्रत ५७ ऋतुकाल के अतिरिक्त स्त्रीगमन ३२ स्नातक का राजादि धन लेना ५८ स्त्रियों का आदर ३५ शारीरिक पवित्रता ५९ स्त्रियों के कर्तव्य ,, स्नातक के औपचारिक कर्म ६० प्रोषितपतिका का कर्तव्य ३६ दान लेने में दोष ६३ पतिहीना का कर्तव्य ३८ उपाकर्म का समय ,, अनेक पत्नियों में सहधर्मिणी ,, उत्सर्जन का समय ६४ पत्नी की मृत्यु पर दूसरा विवाह ३९ अनध्याय के अवसर ,, ( ४ ) वर्णजातिविवेकप्रकरण औपचारिक कर्तव्य ६७ सजातिपुत्र ,, धर्माचरण का आधार ६९ अनुलोमविवाह से उत्पन्न पुत्र ४० विवाद के परित्याग का फल ,, प्रतिलोमविवाह से उत्पन्न पुत्र ४१ स्नान का नियम ७० जाति के उत्कर्ष का नियम ४३ दूसरे की वस्तु के उपयोग का निषेध ,, ( ५ ) गृहस्थधर्मप्रकरण अभोज्य अन्न ,, स्मार्त और श्रौतकर्म की अग्नि ४४ अन्नग्रहण के नियम का अपवाद ७२ गृहस्थ के धर्म ,, ( ७ ) भक्ष्याभक्ष्यप्रकरण योगक्षेम के लिए राजाश्रय ४५ निषिद्ध अन्न ७२ वेद आदि का जप ४६ कतिपय बासी खाद्य वस्तुएँ ७३ पञ्चमहायज्ञ ,, अपेय दूध ७४ भोजन कराने का क्रम ४७ मांसभक्षण के लिए निषिद्ध पक्षी ७५ अतिथियों को भोजन कराने में प्याज आदि का निषेध ७७ वर्ण का विचार ४८ मांसभक्षण का अवसर ७८ वेदपाठी का सत्कार ४९ यज्ञ के अतिरिक्त पशुवध का फल ७९ मधुपर्क के पात्र ,, मांस न खाने का फल ,, सायंकालीन कर्तव्य ५१ ( ८ ) द्रव्यशुद्धिप्रकरण धर्म, अर्थ, काम का संतुलन ,, सोने के पात्रों की शुद्धि ८० मान्य व्यक्ति ५२ यज्ञिय पात्रों की शुद्धि ८१ मार्ग देने योग्य व्यक्ति ,, लेपयुक्त पात्रों की शुद्धि ,, द्विजातियों के कर्तव्य ,, वस्त्रों की सफाई ८२ शूद्र के कर्तव्य ५३ पृथ्वी की शुद्धि ८४ साधारण धर्म ५४ अन्न की शुद्धि ,,