याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary
महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ३८ ) [बायाँ स्तम्भ] जल और मांस की शुद्धि का विचार ८७ पशुओं के मुख की शुद्धि-अशुद्धि ८८ मुख की शुद्धि ८९ आचमन के अवसर " ( ९ ) दानप्रकरण • ब्राह्मणों का महत्त्व ९० दान की वस्तुएँ ९१ दान के पात्र ९२ गोदान और उसका फल " उभयतोमुखी गोदान ९३ गोदान के तुल्य कर्म ९४ दान की अन्य वस्तुएँ " दान न लेने की प्रशंसा ९६ अयाचित वस्तु को स्वीकार करना " दाता के चरित्र का विचार ९७ वृत्तिनिर्वाह के लिए नियमापवाद " ( १० ) श्राद्धप्रकरण श्राद्ध का अर्थ ९७ पार्वणश्राद्ध का स्वरूप " श्राद्ध के ब्राह्मण ९८ श्राद्ध में वर्जित ब्राह्मण ९९ पार्वणश्राद्ध का प्रयोग १०१ अग्नौकरण १०६ ब्राह्मण भोजन की विधि १०८ पिण्डदान १०९ अक्षय्योदकदान ११० स्वधावाचन " ब्राह्मणप्रार्थना और विसर्जन १११ वृद्धिश्राद्ध ११२ एकोद्दिष्ट कर्म ११३ सपिण्डीकरण ११४ एकोद्दिष्ट का समय १२१ भोज्यवस्तुओं का विशिष्ट फल " श्राद्ध की तिथि के अनुसार फल १२३ नक्षत्र के अनुसार श्राद्ध का फल १२४ श्राद्ध के देवता १२५ [दायाँ स्तम्भ] ( ११ ) गणपतिकल्पप्रकरण विघ्न के कारक हेतु १२६ विघ्न के ज्ञापक हेतु १२७ विघ्न के प्रत्यक्ष लक्षण " विघ्न की शान्ति के लिए कर्म १२८ स्नपन की विधि " उपस्थान के मन्त्र १३२ ग्रहपूजा १३३ महागणपति की पूजा का फल १३४ ( १२ ) ग्रहशान्तिप्रकरण ग्रहयज्ञ १३४ नव ग्रहों के नाम १३५ ग्रहों की मूर्तियों की धातुएँ " ग्रहपूजा की विधि १३६ ग्रहपूजा के मन्त्र " ग्रहपूजा की समिधाएँ " नवग्रहों के भोजन १३७ ग्रहपूजा की दक्षिणा १३८ दुष्टग्रहों की पूजा " ( १३ ) राजधर्मप्रकरण • अभिषिक्त राजा का धर्म १३९ राजा का मन्त्री १४१ राजा का पुरोहित " राजा द्वारा ब्राह्मणों का सत्कार १४२ राजा का लक्ष्य " भूमिदान का लेख्यकरण १४३ लेख्यकरण की विधि " राजा का निवासस्थान १४४ विभागीय अध्यक्षों की नियुक्ति १४५ युद्ध में अपहृत धन का दान " युद्ध में वीरगति " युद्ध में अवध्य व्यक्ति १४६ राजा का दैनिक कार्यक्रम " राजा का विशेष व्यक्तियों से विशेष व्यवहार १४९ प्रजापालन का फल " पीडित प्रजा की रक्षा १५०