याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary
महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ३६ ) धर्मपूर्वक कोश की वृद्धि १५१ दूसरे राष्ट्र की विजय का फल ,, पराजित देश की मर्यादा का पालन १५२ मन्त्रणा का गोपन ,, पड़ोसी राज्यों से सतर्कता १५३ साम दान आदि उपाय ,, सन्धि और विग्रह १५४ आक्रमण करने का समय ,, दैव और पौरुष ,, मित्र की प्राप्ति की श्रेष्ठता १५५ राज्य के अङ्ग १५५ दण्ड और धर्म ,, दण्डधारण की योग्यता ,, अनुचित दण्डप्रयोग का अधर्म १५७ शास्त्रानुसार दण्डप्रयोग का फल ,, अधर्मी स्वजन भी दण्ड्य ,, उचित दण्डप्रयोग का पुण्य १५८ त्रसरेणु, लिक्षा, राजसर्षप, गौरसर्षप, मध्यमयव, कृष्णल, माष, सुवर्ण और पल का परिमाण १५९ रूप्यमाष, धरण, पल, निष्क, कर्ष, पण १६० उत्तम, मध्यम, अधम साहस के लिए आर्थिक दण्ड की मात्रा १६१ दण्ड के प्रकार १६२ दण्डव्यवस्था के निमित्त ,, २. व्यवहाराध्यायः ( १ ) साधारणव्यवहारमातृका- प्रकरण व्यवहार के सभासदों की योग्यता १६४ राजा की अनुपस्थिति में धर्मज्ञ ब्राह्मण की नियुक्ति १६५ धर्मविरुद्ध सभासदों को दण्ड १६६ व्यवहार के विषय १६६ व्यवहार की कार्यवाही १६९ चार प्रकार का विवाद १७४ ( २ ) असाधारणव्यवहारमातृका- प्रकरण प्रत्यभियोग १७५ कलह और साहस के अपराध में अभियोग १७६ अभियोग को छिपाने पर दण्ड १७७ तात्कालिक निर्णय वाले वाद १७८ दुष्ट साक्षी के लक्षण १७९ साक्षियों का क्रम १८० सपणविवाद का निर्णय १८१ दो धर्मशास्त्रवचनों में विरोध की स्थिति १८३ लिखित, भुक्ति, साक्षी प्रमाण १८४ दूसरे का कब्जा होने पर अधिकार निर्णय १८६ इसका अपवाद १८९ लेख और भोग का विचार १९२ आगम या लेख का उपयोग १९३ व्यवहार देखने वाले अन्य व्यक्ति १९४ पुनर्विचार के योग्य व्यवहार १९५ असिद्धव्यवहार १९५ खोयी वस्तु के विषय में विचार १९७ चोरों से छीने गये धन १९९ ( ३ ) ऋणादानप्रकरण ब्याज की दर १९९ ऋण की वापसी २०२ ऋण भुगतान में जाति का विचार २०३ ऋण दिलवाने में राजा का अंश २०३ ऋण न लौटाने पर जाति के अनुसार कार्य २०४ ब्याज न लगने की स्थिति ,, ऋणी की मृत्यु पर ऋण भुगतान २०५ न लौटाये जाने वाले दूसरे के ऋण ,, स्त्रियों द्वारा लिया गया ऋण २०६ स्त्री द्वारा देय ऋण - पुत्र और पौत्र द्वारा देय ऋण २०७ प्रातिभाव्य का अर्थ २११