भारतकोश
याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary

महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished782 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 782 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 46

( ४० ) अनेक प्रतिभू द्वारा ऋण भुगतान २१३ | लेख्य के ऋण की वापसी की प्रतिभू द्वारा स्त्री का आदान-प्रदान २१४. | अवधि २३८ बन्धक रखी वस्तु के प्रणष्ट होने का | दूसरा लेख्य लिखने की स्थिति २३९ समय २१५ | सन्दिग्ध लेख्य की शुद्धि २४० ब्याज न देने की स्थितियाँ २१६ | ऋण भुगतान पर लेख्य २४१ आधिनाश पर दूसरी आधि की | ( ७ ) दिव्यप्रकरण व्यवस्था २१७ | दिव्य और उसके भेद २४२ बन्धक वापस न देने पर दण्ड २१९ | दिव्य के प्रयोग के पात्र और भोग्य आधि के विषय में विचार २२० | अवसर २४३ ( ४ ) उपनिधिप्रकरण | तुलादिव्य के लिए अयोग्य व्यक्ति २४५ उपनिधि की परिभाषा २२१ | तप्तकाल, विष, तुलादिव्य की उपनिधि लौटाने के नियम का | अवस्था २४७ अपवाद २२२ | तुलादिव्य के प्रयोग की विधि उपनिधि के भोग का दण्ड ” | और मंत्र २४८ ( ५ ) साक्षिप्रकरण | अग्निदिव्य के प्रयोग की विधि साक्षी के स्वरूप का निर्णय २२३ | और मन्त्र २५३ साक्षी के भेद और योग्यता २२४ | जलदिव्य के प्रयोग की विधि और साक्षी होने के अयोग्य व्यक्ति २२५ | मन्त्र २५६ साक्षी के विषय में नियम का | विषदिव्य की विधि और मन्त्र २५९ अपवाद २२६ | कोशविधि २६१ साक्षियों को उद्‌बोधन या उपदेश २२७ | तण्डुलविधि, तप्तमाषकविधि २६२ झूठे साक्षी के लिए दण्ड २२८ | धर्माधर्मविधि २६३ साक्षियों के वचनों में विरोध की | ( ८ ) दायविभागप्रकरण स्थिति २२९ | दायशब्द का अर्थ २६५ साक्षियों की सत्यता के विषय में | दाय के दो भेद २६९ विचार २३० | पिता द्वारा किया गया सम, विषम कूटसाक्षियों के दण्ड २३२ | विभाग २७० साक्षी का असत्य भाषण विहित | माता-पिता की मृत्यु के बाद विभाग होने की स्थिति २३४ | की विधि २७१ असत्य भाषण का प्रायश्चित्त २३५ | अविभाज्य धन २७३ ( ६ ) लेख्यप्रकरण | अविभाज्य धन के अपवाद २७६ लेख्य के दो प्रकार २३६ | पौत्र का अंश ” लेख्य में व्यक्ति और समय का | पितामह के धन में अंश २७६ विस्तृत लेखन ” | माता का अंश २७९ ऋणदाता और ऋणी साक्षियों और | असंस्कृत भाइयों के संस्कार का लेखक के हस्ताक्षर २३७ | दायित्व ” स्वयं लिखा गया लेख्य २३८ | अनेक वर्ण की कई पत्नियों के | पुत्रों का भाग २८१

याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित) · पृष्ठ 46, कुल 782 में से · BharatKosha