याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary
महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ४१ ) छिपा कर रखे हुए धन का विभाग २८३ | ( १० ) स्वामिपालविवादप्रकरण नियोगज पुत्र का भाग ,, | दूसरे का खेत चराने पर दण्ड ३१३ औरसपुत्र और पुत्रिकासुत २८५ | अधिक अपराध होने पर दूना दण्ड ३१४ गूढज और कानीन पुत्र ,, | चरवाहे और पशु के स्वामी को पौनर्भव और दत्तक पुत्र २८६ | दण्ड ३१५ क्रीत और कृत्रिम सहोढज पुत्र ,, | क्षेत्रविशेष के विषय में अपवाद ,, अपविद्ध पुत्र २८७ | पशुविशेष के संबन्ध में दण्ड का दासीपुत्र का अंश २८९ | अभाव ३१६ पुत्रहीन के धन का अधिकारी ,, | चरवाहे का पशुस्वामी के प्रति वाणप्रस्थ, यति, ब्रह्मचारी की | दायित्व ,, संपत्ति २९७ | पशुनाश पर चरवाहे को दण्ड ३१७ संसृष्टी को धन का विचार २९९ | चरागाह की व्यवस्था ,, विभाग में अंशप्राप्ति के लिए अयोग्य | चरागाह की भूमि और स्थान ३१८ व्यक्ति ३०० | ( ११ ) अस्वामिविक्रयप्रकरण इस नियम का अपवाद ,, | अस्वामिविक्रय का लक्षण ३१८ अयोग्य सदस्यों की स्त्रियों की | कममूल्य पर क्रय का निषेध ,, स्थिति ३०१ | खोई वस्तु देखने पर कर्तव्य ३१९ स्त्रीधन ,, | लेख्य और उपभोग द्वारा खोई स्त्रीधन का उत्तराधिकारी ३०२ | वस्तु ३२० वाग्दत्ता का धन, उसके हरण | स्वयं अपनी अपहृत वस्तु लेने पर का दण्ड ३०४ | दण्ड ३२१ पति द्वारा स्त्रीधन न लौटाने की | राजा को अर्पित खोई वस्तु का स्थिति ३०४ | निर्णय ,, दो पत्नियों में पहली पत्नी का | खोये हुए पशु की प्राप्ति पर राजा स्त्रीधन ३०५ | को देय धन ३२२ घर और खेत का विभाग ,, | ( १२ ) दत्ताप्रदानिकप्रकरण ( ६ ) सीमाविवादप्रकरण | दत्ताप्रदानिक का स्वरूप ,, सीमाविवाद का निर्णय ३०६ | दत्तानपाकर्म का स्वरूप ,, सीमानिर्णय के साधन ३०८ | चार प्रकार का दत्तानपाकर्म ,, ग्राम सामन्ता आदि ३०८ | दान कितना दें, क्या न दें ? ३२३ झूठे बोलने वाले सामन्तादि के | दान सबके सामने लेना चाहिए ,, दण्ड ३०९ | दत्तादत्त का स्वरूप ३२४ मर्यादा तोड़ने का दण्ड ३११ | अदत्त का प्रकार ,, खेत छीन लेने का दण्ड ,, | ( १३ ) क्रीतानुशयप्रकरण दूसरे के खेत में कूप, सेतु का | क्रीतानुशय ३२५ निर्माण ३१२ | क्रीतानुशय का स्वरूप ,, खेत की जोत की व्यवस्था ३१३ |