याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary
महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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[बायाँ स्तम्भ]
प्रत्यर्पणीयनिर्णय ३२५ बीजा आदि खरीदने में परीक्षावधि ,, सोना, चाँदी, पीतल, शीशा, ताँबा, लोहा की परीक्षा ३२६ कम्बल और सूती कपड़े के वजन ,, कसीदाकारी आदि से वस्त्र के भार में कमी ३२७ द्रव्य के नाश होने पर निर्णय ,, (१४) अभ्युपेत्याशुश्रूषाप्रकरण अभ्युपेत्या शुश्रूषा का स्वरूप ३२७ पाँच प्रकार के शुश्रूषक ३२८ चार प्रकार के कर्मकर ,, दो प्रकार के कर्म ,, तीन प्रकार के भृतक ,, दासों के भेद ,, दासता से मुक्ति का समय ३२९ संन्यास से च्युत व्यक्ति राजा का दास ३३० दास अपने से निम्नवर्ण का होता है ,, अन्तेवासी का धर्म ,, (१५) संविद्व्यतिक्रमप्रकरण संविद्व्यतिक्रम का लक्षण ३३१ धर्म की रक्षा के लिए ब्राह्मण की स्थापना ,, सामयिक और राजा द्वारा निर्दिष्ट धर्म का पालन ३३२ गण के व्यक्तियों के अनुसरण का नियम ,, समूह के कार्य के लिए आये हुए व्यक्तियों का राजा द्वारा सत्कार ३३३ समूह के कार्य से प्रेषित व्यक्ति को प्राप्त धन ,, कार्यचिन्तकों के लक्षण ,, श्रेणी, नैगम, पाखण्डी, गण के विषय में नियम ३३४
[दायाँ स्तम्भ]
(१६) वेतनादानप्रकरण वेतनादान का स्वरूप ३३४ वेतन लेकर काम छोड़ने पर दण्ड ,, बिना वेतन लिए कार्य करना स्वीकार करके कार्य न करने पर दण्ड ३३४ भृत्यों को लाभांश (वोनस) का विधान ३३५ भृत्य के कार्य से हानि और लाभ तथा उसका वेतन ,, दो भृत्यों के एक कार्य करने पर वेतन ३३६ भार ढोने वाले भृत्य के विषय में निर्णय ,, मार्ग में कार्य छोड़ने वाले की मजदूरी ,, (१७) द्यूतसमाह्वयप्रकरण जुए की बाजी का स्वरूप ३३७ द्यूतसभा के अधिकारी का अंश ३३८ द्यूताधिकारी का कर्त्तव्य ,, राजा का सभिकों के प्रति कर्तव्य ,, जुए में हारजीत का निर्णय ३३९ कपटपूर्वक जुआ खेलने वाले का दण्ड ,, जुए के निषेध के लिए दण्ड ,, द्यूताध्यक्ष की नियुक्ति ,, प्राणिद्यूत का नियम ३४० (१८) वाक्पारुष्यप्रकरण वाक्पारुष्य का लक्षण ३४० वाक्पारुष्य के तीन प्रकार ,, निष्ठुर आक्रोश का दण्ड ,, गाली देने का दण्ड ३४१ गाली देने के दण्ड में वर्ग का विचार ,, वर्णों की प्रतिलोमता के आधार पर दोष लगाने का दण्ड ३४२