यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 115, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध नौवां अध्याय वाले विश्वे देव सहित देवों के लिए स्वाहा. उत्तर दिशा का नेतृत्व करने वाले मित्रावरुण देव और मरुद्गण के लिए स्वाहा. ऊपर और स्वर्गलोक का नेतृत्व करने वाले सोम सहित अन्य देवों के लिए स्वाहा. ( ३६ ) अग्ने सहस्व पृतना ऽ अभिमातीरपास्य. दुष्टरस्तरन्नरातीयर्चोधा यज्ञवाहसि.. ( ३७) हे अग्नि! आप शत्रुओं को हराइए. आप शत्रुओं का नाश कीजिए. हे अग्नि! आप को जीतना दुर्लभ है. हे अग्नि! आप मंत्रपूर्वक यज्ञ करने वाले यजमान को अन्न दीजिए. तेजस्वी बनाइए. ( ३७ ) देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्याम्. उपा २४ शोर्वीर्येण जुहोमि हत २४ रक्षः स्वाहा रक्षासं त्वा वधायावधिष्म रक्षोवधिष्मामुमसौ हतः... ( ३८) हे सविता देव! आप संसार को उपजाने वाले हैं. हम अश्विनीकुमारों की भुजाओं और पूषा देवता के हाथों से आप को हवि चढ़ाते हैं. आप ने शूरवीरता से शत्रुओं को खदेड़ा, मारा. जैसे यह राक्षस मारा गया वैसे ही शत्रु भी मारे जाएं. ( ३८ ) सविता त्वा सवाना २४ सुवतामग्निर्गृहपतीना २४ सोमो वनस्पतीनाम्. बृहस्पतिर्वाच ऽ इन्द्रो ज्यैष्ठ्याय रुद्रः पशुभ्यो मित्रः सत्यो वरुणो धर्मपतीनाम्.. ( ३९) हे सविता देव! आप यजमानों को यज्ञ के लिए प्रेरित करने की कृपा कीजिए. हे अग्नि! आप गृहपतियों को ( यज्ञ के लिए ) प्रेरित करने की कृपा कीजिए. सोम यजमानों को वनस्पति प्रदान करने की कृपा करें. बृहस्पति देव हमें वाणी प्रदान करने की कृपा करें. इंद्र देव हमें ज्येष्ठता ( बड़ाई ) प्रदान करें. रुद्र देव हमें पशु प्रदान करने की कृपा करें. मित्र देव हमें सत्यवादी बनाने की कृपा करें. वरुण देव हमें धर्म पालक बनाने की कृपा करें. ( ३९ ) इमं देवा ऽ असपत्न २४ सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायैन्द्रस्येन्द्रियाय. इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश ऽ एष वोमी राजा सोमोस्माकं ब्राह्मणाना २४ राजा.. (४०) हे यजमानो! सोम राजा हैं. सोम हम ब्राह्मणों के राजा हैं. सोम अमुक पुत्र अमुक के पुत्र पर अपनी कृपा बनाए रखें. ये देवगण महान् क्षत्रिय जैसा बल पाने के लिए प्रेरित करें. महान् राज्य व महान जन राज्य के लिए प्रेरित करने की कृपा करें. हमें इंद्र देव जैसा समृद्धिशाली बनाने की कृपा करें. ( ४० ) यजुर्वेद - ११५