भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 116

दसवां अध्याय अपो देवा मधुमतीरगृह्णन्नूर्जस्वती राजस्वश्चितानाः. याभिर्मित्रावरुणावभ्यषिञ्चन्याभिरिन्द्रमनयन्नत्यरातीः.. (१) देवताओं ने मधुर, ऊर्जस्वी, राजोचित व चेतना जगाने वाला जल ग्रहण किया. जिन जलों से मित्र, वरुण आदि देवताओं का अभिषेक किया तथा अन्य देवताओं ने जिन जलों से इंद्र देव का अभिषेक किया, हम यजमान उन जलों को ग्रहण करते हैं. ये जल शत्रुनाशक हैं. (१) वृष्ण ऽ ऊर्मिरसि राष्ट्रदा राष्ट्रं मे देहि स्वाहा वृष्ण ऽ ऊर्मिरसि राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै देहि वृषसेनोसि राष्ट्रदा राष्ट्रं मे देहि स्वाहा वृषसेनोसि राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै देहि.. (२) जलधाराएं लहरदार, बलवती, राष्ट्रदायिनी हैं. वे मुझे राष्ट्र प्रदान करें. इन के लिए स्वाहा. वे विशाल सेना वाली हैं. इन के लिए स्वाहा. वे राष्ट्रदायिनी हैं. इन के लिए स्वाहा. वे मुझे राष्ट्र प्रदान करें. इन के लिए स्वाहा. वे विशाल सेना वाली हैं. इन के लिए स्वाहा. वे विशाल राष्ट्रदायिनी हैं. इन के लिए स्वाहा. हमें राष्ट्र प्रदान करने की कृपा करें. (२) अर्थेत स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहार्थेत स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्तौजस्वती स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहौजस्वती स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्तापः परिवाहिणी स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रं मे दत्त स्वाहापः परिवाहिणी स्थ राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै दत्तापां पतिरसि राष्ट्रदा राष्ट्रं मे देहि स्वाहापां पतिरसि राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै देह्यपां गर्भोसि राष्ट्रदा राष्ट्रं मे देहि स्वाहापां गर्भोसि राष्ट्रदा राष्ट्रममुष्मै देहि.. (३) ये जल अर्थदायी हैं. हमें अर्थ प्रदान करने की कृपा करें. ये जल राष्ट्रदायी हैं. हमें राष्ट्र प्रदान करने की कृपा करें. इन के लिए स्वाहा. ये जल ऊर्जादायी हैं. हमें ऊर्जा प्रदान करने की कृपा करें. ये जल राष्ट्रदायी हैं. हमें राष्ट्र प्रदान करने की कृपा करें. ये जल पराक्रमदायी हैं. हमें पराक्रम प्रदान करें. ये जल राष्ट्रदायी हैं. हमें राष्ट्र प्रदान करें. इन के लिए स्वाहा. ये जल पराक्रमदायी हैं. हमें पराक्रम प्रदान करें. इन के लिए स्वाहा. ये जल सब जलों के पालकपोषक हैं तथा उन्हें अपने अधीन रखने में सक्षम हैं. हमें राष्ट्र प्रदान करें. इन के लिए स्वाहा. ये जल सब जलों ११६ - यजुर्वेद