भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 148, कुल 421 में से

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पृष्ठ 148

पूर्वार्ध बारहवां अध्याय अय छ्ष सो अग्निर्यस्मिन्त्सोममिन्द्रः सुतं दधे जठरे वावशानः. सहस्रियं वाजमत्यं न सप्ति छ्ष ससवान्त्सन्स्तूयसे जातवेदः.. (४७) यह वही अग्नि है, जिसे सोम के रूप में इंद्र देव अपनी जठराग्नि में भरते हैं. यह हजार गुना है. यह अन्नमय, बलदायी और सर्वज्ञ है. हजारों के द्वारा इन की स्तुति की जाती है. ( ४७ ) अग्ने यत्ते दिवि वर्चः पृथिव्यां यदोषधीष्वप्स्वा यजत्र. येनान्तरिक्षमुर्वाततन्थ त्वेषः स भानुरर्णवो नृचक्षाः.. (४८) हे अग्नि! आप का जो वर्चस्व स्वर्गलोक में है, वही वर्चस्व पृथ्वीलोक में है. वही वर्चस्व ओषधियों व जलों में है. जिस से आप ने अंतरिक्ष का विस्तार किया वही यह सूर्य है. वह सभी मनुष्यों को देखने वाला है. ( ४८ ) अग्ने दिवो अर्णमच्छा जिगास्यच्छा देवाँ २ ऊचिषे धिष्ण्या ये. या रोचने परस्तात् सूर्यस्य याश्चावस्तादुपतिष्ठन्त ऽ आपः.. (४९) हे अग्नि! आप स्वर्गलोक से सीधे जल पाते हैं. देवगण हमारी बुद्धि को ऊंचाई की ओर प्रेरित करते हैं. जो सामने सूर्य के रूप को भासित है और जो नीचे जल के रूप में स्थित है, आप दोनों प्रकार के जलों की बरसात करने की कृपा करते हैं. ( ४९ ) पुरीष्यासो अग्नयः प्रावणेभिः सजोषसः. जुषन्तां यज्ञमद्रुहोनमीवा ऽ इषो महीः.. (५०) हे अग्नि! पशुओं का हित साधने वाली, लोक में व्यापक मन के साथ प्रेम रखने वाली, बीमारियां दूर करने वाली, अन्न देने वाली, वर्षा करने वाली, इष्ट सिद्धि करने वाली अग्नियां प्रेमपूर्वक इस यज्ञ का सेवन करने की कृपा करें. ( ५० ) इडामग्ने पुरुद छ्ष स छ्ष सनिं गोः शश्वत्तम छ्ष हवमानाय साध. स्यानः सूनुस्तनयो विजावाग्ने सा ते सुमतिर्भूत्वस्मे.. (५१) हे अग्नि! आप बहुकर्मा हैं. आप यजमान के लिए गाय के ( दूध, दही ) घी आदि का दान कीजिए. हमें पुत्र संतान दीजिए. हमारी संतान हमारा और आगे वंश बढ़ाए. अपनी वह कल्याणकारी बुद्धि हमें प्राप्त कराइए. ( ५१ ) अयं ते योनिर्ऋत्वियो यतो जातो अरोचथाः. तं जानन्नग्न ऽ आ रोहाथा नो वर्धया रयिम्.. (५२) हे अग्नि! आप की यह वेदी ऋतु को जन्म देने वाली है. इसी से उत्पन्न हो कर आप चमकते हैं. आप यह जानते हुए इस पर चढ़ने की कृपा कीजिए. आप हमारे धन की बढ़ोतरी करने की कृपा कीजिए. ( ५२ ) १४८ - यजुर्वेद