भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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परम शक्ति की उत्पत्ति एवं विकास १७-२१ २०९-२१० विश्वकर्मा की स्तुति २२-२३ २१०-२११ परम तत्त्व की विवेचना २४-३२ २११-२१२ इंद्र की वीरता ३३-३५ २१२-२१३ बृहस्पति देव की उपासना ३६ २१३ इंद्र व वरुण आदि देवों का पराक्रम ३७-४९ २१३-२१५ अग्नि की स्तुति ५० २१५ इंद्र की स्तुति ५१ २१५ अग्नि से कल्याण कामना ५२-५५ २१५-२१६ यज्ञ की महत्ता ५६-५७ २१६ सूर्य देव की उपासना ५८-६० २१६-२१७ इंद्र की स्तुति ६१-६४ २१७ अग्नि की महिमा एवं उपासना ६५-७३ २१७-२१९ सविता देव की स्तुति ७४ २१९ अग्नि की स्तुति ७५-७७ २१९ यज्ञ में देवों का आह्वान ७८ २२० अग्नि का स्वरूप ७९-८५ २२०-२२१ मरुद्गण की सेना ८६ २२१ घी की धाराएं ८७-९८ २२१-२२३ अग्नि की स्तुति ९९ २२३ अठारहवां अध्याय यज्ञ के सर्वविध फलीभूत होने की कामना १-२७ २२४-२३० विभिन्न महीनों के लिए आहुति समर्पण २८ २३० देवत्व प्राप्ति की कामना २९ २३० पृथ्वी तथा प्रकृति की अनुकूलता हेतु प्रार्थना ३०-३४ २३०-२३१ अग्नि एवं सविता देव से कृपा की कामना ३५-३८ २३१-२३२ रक्षा के लिए सूर्य से प्रार्थना ३९-४० २३२ गंधर्वों के लिए आहुति अर्पण ४१-४३ २३२-२३३ प्रजापति के लिए आहुति अर्पण ४४-४५ २३३ तेजस्विता के लिए अग्नि से प्रार्थना ४६-४८ २३३-२३४ वरुण देव की वंदना ४९ २३४ सूर्य के लिए स्वाहा ५० २३४ अग्नि की स्तुति ५१-५७ २३४-२३५