यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपरम शक्ति की वंदना ५८-६० २३५-२३६ बहुरूपा अग्नि ६१-६७ २३६-२३७ शत्रु विनाश के लिए इंद्र का आह्वान ६८-७१ २३७ विश्व कल्याण के लिए अग्नि से प्रार्थना ७२-७७ २३७-२३८ उन्नीसवां अध्याय औषध देव की स्तुति १ २३९ सोम सिंचन २ २३९ इंद्र सखा वायु की शुद्धता ३ २३९ सोम की स्तुति ४-५ २३९-२४० किसान और अन्न ६ २४० सोम से प्रार्थना ७-९ २४० शक्ति की उपासना १० २४०-२४१ कल्याणकारी मातापिता ११ २४१ यज्ञ का विस्तार १२ २४१ सोम का स्वरूप १३-१६ २४१ यज्ञ व कुशा आदि से प्राप्ति १७-२० २४२ धान व लपसी आदि सोम का रूप हैं २१-२३ २४२-२४३ ऋचाओं के विविध रूप २४-२५ २४३ यज्ञ के विभिन्न अवयवों से प्राप्तियां २६-३१ २४३-२४४ सोम निरूपण ३२-३५ २४४-२४५ पितरों के लिए आहुतियां ३६-३७ २४५ अग्नि का पवित्र स्वरूप ३८-४२ २४५-२४६ सविता व विश्वे देवी आदि से पवित्रता के लिए प्रार्थना ४३-४४ २४६ पितृ एवं देव मार्ग ४५-४७ २४६ बढ़ोतरी के लिए अग्नि से प्रार्थना ४८ २४६-२४७ रक्षा एवं कल्याण के लिए पितृ वंदना ४९-५१ २४७ सोम की स्तुति ५२-५४ २४७-२४८ पितरों का आह्वान ५५-६३ २४८-२४९ अग्नि की उपासना ६४-७० २४९-२५० इंद्र की स्तुति ७१ २५० सोम आदि से उपलब्धियां ७२-७९ २५०-२५२ तनमन के विविध अवयवों की उत्पत्ति ८०-९३ २५२-२५४ सरस्वती देवी और अश्विनीकुमार ९४ २५४ शक्तिवर्धक सोमरस ९५ २५४