यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबीसवां अध्याय वेदिका स्वरूप निरूपण १-४ २५५ बल व पुरुषार्थ की कामना ५-१० २५५-२५६ रक्षा के लिए देवों से प्रार्थना ११ २५६-२५७ परस्पर संयोजन की कामना १२-१३ २५७ पापों से मुक्ति की कामना १४-१७ २५७-२५८ जल संचरण १८-२२ २५८ बढ़ोतरी के लिए अग्नि से याचना २३-२४ २५९ ज्ञानमय लोक पाने की इच्छा २५-२६ २५९ ओषधियों का रस २७-२८ २५९ इंद्र की स्तुति २९ २५९-२६० मरुद्गण की स्तुति ३० २६० अध्वर्यु की स्तुति ३१ २६० प्राणियों के अधिपति की उपासना ३२ २६० ओषधि रूप रस ३३-३५ २६० वृत्रहंता इंद्र ३६-४० २६०-२६१ उषा की वंदना ४१ २६१ इंद्र की स्थापना ४२ २६१-२६२ विघ्न दूर करने के लिए तीन देवियों से प्रार्थना ४३ २६२ त्वष्टा देव की स्तुति ४४ २६२ रक्षा के लिए इंद्र का आह्वान ४५-५४ २६२-२६४ समिधा से अग्नि प्रज्वलन ५५ २६४ तन रक्षक अश्विनीकुमार ५६ २६४ ओषधि से युक्त सोमरस ५७ २६४ सरस्वती के माध्यम से इंद्र का आह्वान ५८ २६४ सरस्वती द्वारा सोम का हरण ५९ २६४ सरस्वती द्वारा स्वर्ग और पृथ्वीलोकों का दोहन ६० २६४ इंद्र के लिए विशेष बल का समय ६१ २६५ रक्षा के लिए त्रिदेव से प्रार्थना ६२ २६५ ओषधि से युक्त सोम ६३ २६५ मधुर रस का दोहन ६४-६५ २६५ सरस्वती द्वारा नमुचि से हवि प्राप्त करना ६६-६८ २५५-२६६ सरस्वती तथा अश्विनीकुमारों द्वारा इंद्र को हवि अर्पण ६९ २६६ इंद्र द्वारा हविपति की रक्षा ७० २६६