भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 173, कुल 421 में से

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पृष्ठ 173

पूर्वार्ध चौदहवां अध्याय किया जाता है. जल सहित आप ऋतुओं के साथ प्रेममय हैं. देवताओं सहित आप ऋतुओं के साथ प्रेममय हैं. देवताओं के अध्वर्यु आप को यहां प्रतिष्ठित करने की कृपा करें. आप ऋतुओं के प्रिय हैं. आप जलों के प्रिय हैं. आप आदित्यों के प्रिय हैं. आप प्राणों से प्रिय हैं. आप ऋतुओं के साथ प्रेममय हैं. आप जलों के साथ प्रेममय हैं. आप रुद्रों के साथ प्रेममय हैं. आप देवताओं के साथ प्रेममय हैं. आप को संसार के कल्याणकारी अग्नि के लिए ग्रहण करते हैं. अध्वर्यु अश्विनीकुमार आप को यहां प्रतिष्ठित करने की कृपा करें. (७) प्राणं मे पाह्यपानं मे पाहि व्यानं मे पाहि चक्षुर्म ऽ उर्व्या विभाहि श्रोत्रं मे श्लोकय. अपः पिन्वौषधीर्जिन्व द्विपादव चतुष्पात् पाहि दिवो वृष्टिमैरय.. (८) आप हमारे प्राण की रक्षा कीजिए. आप हमारे अपान की रक्षा कीजिए. आप हमारे व्यान की रक्षा कीजिए. आप हमारे नेत्रों की रक्षा कीजिए. आप हमें व्यापक दृष्टि प्रदान कीजिए. आप हमारे कानों को पूर्ण रूप से सामर्थ्यशाली बनाइए. आप उर्वी (पृथ्वी) पर कृपालु होइए. आप पृथ्वी को जल से सींचिए. आप पृथ्वी को ओषधियों से सींचिए. आप दोपायों की रक्षा कीजिए. आप चौपायों की रक्षा कीजिए. आप स्वर्गलोक से हम पर कृपा की बरसात कीजिए. (८) मूर्धा वयः प्रजापतिश्छन्दः क्षत्रं वयो मयन्दं छन्दो विष्टम्भो वयोधिपतिश्छन्दो विश्वकर्मा वयः परमेष्ठी छन्दो वस्तो वयो विवलं छन्दो वृष्णिर्वयो विशालं छन्दः पुरुषो वयस्तन्द्रं छन्दो व्याघ्रो वयोधामृष्टं छन्दः सिँहो वयश्छदिश्छन्दः षष्ठवाड़्वयो बृहती छन्द ऽ उक्षा वयः ककुप् छन्द ऽ ऋषभो वयः सतोबृहती छन्दः.. (९) प्रजापति ने गायत्री छंद से मूर्धन्य ब्राह्मणों को उत्पन्न किया. प्रजापति ने वय छंद से संरक्षणशील क्षत्रियों को उत्पन्न किया. आयु अधिपति ने विष्टंभ छंद से वैश्य को उत्पन्न किया. विश्वकर्मा ने परमेष्ठ छंद से शूद्र को उत्पन्न किया. प्रजापति ने एक पद छंद से भेड़ को उत्पन्न किया. उन्होंने एक पंक्ति पद छंद से मनुष्य को उत्पन्न किया. उन्होंने विराट् छंद से व्याघ्र को उत्पन्न किया. उन्होंने अतिजगती छंद से सिंह को उत्पन्न किया. उन्होंने बृहती छंद से भारवाही पशु को उत्पन्न किया. उन्होंने ककुप् छंद से उक्षा जाति को उत्पन्न किया. उन्होंने सतोबृहती छंद से ऋषभ (भालू) को उत्पन्न किया. (९) अनड्‌वान्वयः पङ्क्तिश्छन्दो धेनुर्वयो जगती छन्दस्त्र्यविर्वयस्त्रिष्टुप् छन्दो दित्यवाड़्वयो विराट् छन्दः पञ्चाविर्वयो गायत्री छन्दस्त्रिवत्सो वय ऽ उष्णिक् छन्दस्तुर्यवाड़्वयोनुष्टुप् छन्दो लोकं त इन्द्रम्.. (१०) प्रजापति ने पंक्ति छंद से सांड को उत्पन्न किया. उन्होंने जगती छंद से गाय को उत्पन्न किया. उन्होंने त्रिष्टुप् छंद से त्र्यवि जाति को उत्पन्न किया. प्रजापति ने विराट् से भारवाहक पशुओं को उत्पन्न किया. उन्होंने उष्णिक् से तीन वत्स वाले पशुओं यजुर्वेद - १७३