भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 175, कुल 421 में से

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पृष्ठ 175

पूर्वार्ध चौदहवां अध्याय ये अग्नयः समनसोन्तरा द्यावापृथिवी इमे. वार्षिकावृतू अभिकल्पमाना ऽ इन्द्रमिव देवा ऽअभिसंविशन्तु तया देवतयाङ्गिरस्वद् ध्रुवे सीदतम्.. (१५) सावन और भादों दोनों महीने वर्षा ऋतु से संबंधित हैं. आप अग्नि के भीतर जुड़े हुए हैं. हमारे लिए स्वर्गलोक फलीभूत हों. हमारे लिए पृथ्वीलोक फलीभूत हों. हमारे लिए जल फलीभूत हों. हमारे लिए ओषधियां फलीभूत हों. हे इष्टकाओ! आप चमकीली, पवित्र, ग्रीष्म ऋतु जैसी व अग्नि के भीतर जुड़ी हुई हैं. आप स्वर्गलोक तक विस्तार पाएं. आप पृथ्वीलोक तक कल्पित होने की कृपा करें. ओषधियां फलीभूत हों. जल अग्नियां फलीभूत हों. व्रत सहित अग्नियां ज्येष्ठता ( बड़प्पन ) के लिए प्रेरित करने की कृपा करें. जो अग्नियां हम समान मन वालों के भीतर हैं, वे स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक को शोभित करने की कृपा करें. ग्रीष्म ऋतु को दोनों ओर से फलीभूत करती हुई इंद्र देव के समान देवताओं में शोभित हों. अपनी दिव्यता से अंगिरा की भांति स्थिरतापूर्वक विराजने की कृपा करें. ( १५ ) इषश्चोर्जश्च शारदावृतू अग्नेरन्तःश्लेषोसि कल्पेतां द्यावापृथिवी कल्पन्तामाप ऽ ओषधयः कल्पन्तामग्नयः पृथङ्मम ज्यैष्ठ्याय सव्रताः. ये अग्नयः समनसोन्तरा द्यावापृथिवी इमे. शारदावृतू अभिकल्पमाना ऽ इन्द्रमिव देवा ऽ अभिसंविशन्तु तया देवतयाङ्गिरस्वद् ध्रुवे सीदतम्.. (१६) शरद ऋतु के आश्विन और कार्तिक ये दो महीने हैं. सावन और भादों ये दोनों मास वर्षा ऋतु से संबंधित हैं. हे ऋतूरूप इष्टकाओ! आप अग्नि के भीतर जुड़े हुए हैं. हमारे लिए स्वर्गलोक फलीभूत हों. हमारे लिए पृथ्वीलोक फलीभूत हों. हमारे लिए जल फलीभूत हों. हमारे लिए ओषधियां फलीभूत हों. हे इष्टकाओ! आप चमकीली, पवित्र, ग्रीष्म ऋतु जैसी व अग्नि के भीतर जुड़ी हुई हैं. आप स्वर्गलोक तक विस्तार पाएं. आप पृथ्वीलोक तक कल्पित होने की कृपा करें. ओषधियां फलीभूत हों. जल व अग्नियां फलीभूत हों. व्रत सहित अग्नियां ज्येष्ठता ( बड़प्पन ) के लिए प्रेरित करने की कृपा करें. जो अग्नियां हम समान मन वालों के भीतर हैं, वे स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक को शोभित करने की कृपा करें. ग्रीष्म ऋतु को दोनों ओर से फलीभूत करती हुई इंद्र देव के समान देवताओं में शोभित हों. अपनी दिव्यता से अंगिरा की भांति स्थिरतापूर्वक विराजने की कृपा करें. ( १६ ) आयुर्मे पाहि प्राणं मे पाह्यपानं मे पाहि व्यानं मे पाहि चक्षुर्मे पाहि श्रोत्रं मे पाहि वाचं मे पिन्व मनो मे जिन्वात्मानं मे पाहि ज्योतिर्मे यच्छ.. (१७) आप हमारी आयु की रक्षा कीजिए. आप हमारे प्राण की रक्षा कीजिए. आप हमारे अपान की रक्षा कीजिए. आप हमारे व्यान की रक्षा कीजिए. आप हमारे नेत्रों की रक्षा कीजिए. आप हमारे कान की रक्षा कीजिए. आप हमारी वाणी को मधुर बनाइए. आप यजुर्वेद - १७५