भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 204, कुल 421 में से

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पृष्ठ 204

पूर्वार्ध सोलहवां अध्याय हमारे प्रति कल्याणकारी व अच्छे मन वाले होइए. आप वृक्ष की ठेठ ऊंचाई पर अपने आयुध रख दीजिए. पशुओं की खाल के वस्त्र धारण कर के पधारिए. आप केवल अपना धनुष धारण कर के आइए. ( ५१ ) विकिरिद्र विलोहित नमस्ते अस्तु भगवः. यास्ते सहस्त्र १४ हेतयो ऽ न्यमस्मन्नि वपन्तु ताः... (५२) हे रुद्र देव! आप उपद्रवनाशी हैं. आप शुद्ध स्वरूप हैं. आप हमें भाग्यवान बनाइए. आप को नमस्कार. आप के हजारों अस्त्र हमारे हित साधक हों. वे अस्त्र अन्यों (दुश्मनों) पर पड़ें. ( ५२ ) सहस्राणि सहस्रशो बाह्वोस्तव हेतयः. तासामीशानो भगवः पराचीना मुखा कृधि.. (५३) हे रुद्र देव! आप की बाहुओं में हजारों प्रकार के हजारों अस्त्रशस्त्र हैं. आप उन आयुधों का मुंह हमारी ओर से फेरने की कृपा कीजिए. ( ५३ ) असंख्याता सहस्राणि ये रुद्रा ऽ अधि भूम्याम्. तेषा १४ सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (५४) हे रुद्र देव! आप असंख्य लोगों के नियंत्रक हैं. आप के हजारों गण भूमि पर अधिष्ठित हैं. आप अपने धनुषों को हम से हजारों योजन ( दूरी सूचक एक इकाई ) दूर रखने की कृपा कीजिए. ( ५४ ) अस्मिन् महत्यर्णवे ऽ न्तरिक्षे भवा ऽ अधि. तेषा १४ सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (५५) अनेक लोगों को अपने वश में करने वाले रुद्र देव के हजारों गण इस पृथ्वी पर हैं. वे अपने गणों के धनुषों को हम से दूर रखें. ( ५५ ) नीलग्रीवाः शितिकण्ठा दिव १४ रुद्रा ऽ उपश्रिताः. तेषा १४ सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (५६) हे रुद्र देव! आप नीली गरदन व सफेद कंठ वाले हैं. आप स्वर्गलोक में निवास करते हैं. आप अपने धनुषों को हम से हजारों योजन दूर रखिए. ( ५६ ) नीलग्रीवाः शितिकण्ठाः शर्वा ऽ अधः क्षमाचराः. तेषा १४ सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (५७) हे रुद्र देव! आप नीली गरदन वाले और सफेद कंठ वाले हैं. आप नीचे भूमंडल में विचरण करते हैं. आप अपने धनुषों को हम से हजारों योजन दूर रखने की कृपा कीजिए. ( ५७ ) २०४ – यजुर्वेद