यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 205, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध सोलहवां अध्याय ये वृक्षेषु शष्पिञ्जरा नीलग्रीवा विलोहिताः. तेषा ष् सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (५८) हे रुद्र देव! आप नीली गरदन वाले हैं. आप का रंग हरा है. आप अत्यंत तेजस्वी हैं. आप वृक्षादि में अधिष्ठित हैं. आप अपने धनुष को प्रत्यंचा हीन बना कर हम से हजारों योजन दूर रखिए. ( ५८ ) ये भूतानामधिपतयो विशिखासः कपर्दिनः. तेषा ष् सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (५९) रुद्र देव! आप भूतों के अधिपति व विशेष शिखा ( चोटी ) सहित हैं. जो जटाधारी हैं, आप उन के धनुषों को प्रत्यंचा रहित बनाइए. आप उन्हें हम से हजारों योजन दूर कीजिए. ( ५९ ) ये पथां पथिरक्ष्य ऽ ऐलबृदा ऽ आयुर्युधः. तेषा ष् सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (६०) हे रुद्र देव! आप कई राहों के राहगीरों के रक्षक हैं. अन्न से प्राणियों को पोषण देने वाले व आयुधधारी हैं. जो जीवन के युद्ध में जूझ रहे हैं, आप उन के धनुषों को हम से हजारों योजन दूर कीजिए. आप उन के धनुषों को प्रत्यंचा रहित बनाइए. ( ६० ) ये तीर्थानि प्रचरन्ति सृकाहस्ता निषङ्गिणः. तेषा ष् सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (६१) हे रुद्र देव! जो तीर्थों में हाथ में भाले, बाण आदि ले कर विचरते हैं, आप उन के धनुषों को प्रत्यंचा रहित बना दीजिए. आप उन्हें हम से हजारों योजन दूर कर दीजिए. ( ६१ ) ये ऽ नेषु विविध्यन्ति पात्रेषु पिबतो जनान्. तेषा ष् सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (६२) हे रुद्र देव! जो पात्रों में अन्न पीने वाले लोगों को परेशान करते हैं, आप उन के धनुषों को प्रत्यंचा रहित बना दीजिए. आप उन के धनुषों को हम से हजारों योजन दूर कर दीजिए. ( ६२ ) य एतावन्तश्च भूया ष् सश्च दिशो रुद्रा वितस्थिरे. तेषा ष् सहस्रयोजने ऽ व धन्वानि तन्मसि.. (६३) हे रुद्र देव! जो दिशाओं और बहुत दिशाओं में स्थित रहते हैं, आप उन के धनुषों को प्रत्यंचा रहित बनाइए. आप उन के धनुषों को हम से हजारों योजन दूर रखने की कृपा कीजिए. ( ६३ ) यजुर्वेद - २०५