भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 209, कुल 421 में से

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पृष्ठ 209

पूर्वार्ध सत्रहवां अध्याय नमस्ते हरसे शोचिषे नमस्ते अस्त्वर्चिषे. अन्याँस्ते अस्मत्तपन्तु हेतयः पावको अस्मभ्य १७ँ शिवो भव.. (११) हे अग्नि! आप को नमस्कार. आप की ज्वालाएं चमकीली हैं. आप को नमस्कार. हम आप की अर्चना करते हैं. आप पवित्र करने वाले हैं. जो हमारे द्वेषी हैं, आप उन्हें संतप्त कीजिए. आप हमारे प्रति कल्याणकारी होइए. (११) नृषदे वेड्प्सुषदे वेड् बर्हिषदे वेड् वनसदे वेट् स्वर्विदे वेट्.. (१२) मनुष्यों में स्थित अग्नि ( जठराग्नि ) हेतु आहुति अर्पित है. जलों में स्थित अग्नि ( बड़वाग्नि ) हेतु आहुति अर्पित है. कुश में स्थित अग्नि हेतु आहुति अर्पित है. (१२) ये देवा देवानां यज्ञिया यज्ञियाना १७ँ संवत्सरीणमुप भागमासते. अहुतादो हविषो यज्ञे अस्मिन्त्स्वयं पिबन्तु मधुनो घृतस्य.. (१३) जो देव देवताओं के यज्ञ में यज्ञीय आहुति ग्रहण करते हैं, वे इस यज्ञ में यज्ञ के भाग हवि को ग्रहण करें. देवगण यज्ञ में बिना बुलाए ही मधु और घी की आहुति को स्वयं ही पीने की कृपा करें. (१३) ये देवा देवेष्वधि देवत्वमायन् ये ब्रह्मणः पुर ऽ एतारो अस्य. येभ्यो न ऽ ऋते पवते धाम किञ्चन न ते दिवो न पृथिव्या ऽ अधि स्नुषु.. (१४) जिन देवताओं ने देवाधिदेव की तरह देवत्व का अधिकार पाया, जो ब्राह्मण के सामने विचरते हैं, जिन के बिना शरीर किंचित् ( जरा ) भी पवित्र नहीं होता वे न स्वर्गलोक में हैं, न पृथ्वी में हैं, बल्कि हर एक में विद्यमान हैं. (१४) प्राणदा ऽ अपानदा व्यानदा वर्चोदा वरिवोदाः. अन्यांस्ते अस्मत्तपन्तु हेतयः पावको अस्मभ्य १७ँ शिवो भव.. (१५) हे अग्नि! आप प्राणदाता, अपानदाता, व्यानदाता व वर्चस्वदाता हैं. हे अग्नि! आप वायुदाता व शक्तिदाता हैं. आप के आयुध हमारे शत्रुओं पर पड़ें. आप पवित्र करने वाले हैं. आप हमारे प्रति कल्याणकारी होइए. (१५) अग्निस्तिग्मेन शोचिषा यासद्विश्वं न्यतृत्रिणम्. अग्निर्नो वनते रयिम्.. (१६) हे अग्नि! आप की ज्वालाएं शुचिपूर्ण ( पवित्र ) हैं. हे अग्नि! आप की ज्वालाएं सारे विश्व का कल्याण करने वाली हैं. अग्नि हमें धन प्रदान करने की कृपा करें. (१६) य इमा विश्वा भुवनानि जुह्वदृषिर्होता न्यसीदत् पिता नः. स ऽ आशिषा द्रविणमिच्छमानः प्रथमच्छद्वराँ २ आ विवेश.. (१७) यजुर्वेद - २०९

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