यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 243, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध उन्नीसवां अध्याय पयसो रूपं यद्गवा दध्नो रूपं कर्कन्धूनि. सोमस्य रूपं वाजिन १७ सौम्यस्य रूपमामिक्षा.. (२३) जौ दूध और दही दही रूप में है. अन्न सोम से संबंधित इन रूपों को हम पूरी तरह देखना चाहते व चढ़ाना चाहते हैं. (२३) आश्रावयेति स्तोत्रियाः प्रत्याश्रावो अनुरूपः. यजेति धाय्यारूपं प्रगाथा ये यजामहाः.. (२४) स्तोत्र से संबंधित ऋचाएं आश्रावय व प्रत्याश्राव के अनुरूप हैं. यज से संबंधित ऋचाएं धाय्या रूप हैं. ‘यजामहे' पद से आरंभ होने वाली ऋचाएं प्रगाथा रूप हैं. (२४) अर्धऋचैरुक्थाना १७ रूपं पदैराप्नोति निविदः. प्रणवैः शस्त्राणा १७ रूपं पयसा सोम ऽ आप्यते.. (२५) आधी ऋचाओं से उक्थों का बोध होता है. पदों से निविद का बोध होता है. प्रणवों से शस्त्रों के रूप का बोध होता है. दूध से सोम का रूप प्राप्त किया जाता है. (२५) अश्विभ्यां प्रातःसवनमिन्द्रेणैन्द्रं माध्यन्दिनम्. वैश्वदेव १७ सरस्वत्या तृतीयमाप्त १७ सवनम्.. (२६) अश्विनीकुमारों से प्रातः सवन की प्राप्ति होती है. इंद्र देव और उन से संबंधित मंत्रों से माध्यंदिन सवन की प्राप्ति होती है. सरस्वती देवी विश्वों से संबंधित हैं. उन के माध्यम से तृतीय सवन की प्राप्ति होती है. (२६) वायव्यैर्वायव्यान्याप्नोति सतेन द्रोणकलशम्. कुम्भीभ्यामम्भृणौ सुते स्थालीभिः स्थालीराप्नोति.. (२७) वायव्यों से वायव्य की प्राप्ति होती है. सत् से द्रोणकलश की प्राप्ति होती है. कुंभियों से अंभृण की प्राप्ति होती है. स्थालियों से स्थाली की प्राप्ति होती है. (२७) यजुर्भिराप्यन्ते ग्रहा ग्रहैः स्तोमाश्च विष्टुतीः. छन्दोभिरुक्थाशस्त्राणि साम्नावभृथ ऽ आप्यते.. (२८) यजुमंत्रों से यजु और ग्रहों से ग्रह की प्राप्ति होती है. स्तोत्रों से इष्ट स्तुतियों, छंदों से उक्थ व शस्त्र की प्राप्ति होती है. साम मंत्रों से शस्त्र साम व अवभृथ की प्राप्ति होती है. (२८) इडाभिर्भक्षानाप्नोति सूक्तवाकेनाशिषः. शंयुना पत्नीसंयाजान्त्समिष्टयजुषा स १७ स्थाम्.. (२९) यजुर्वेद - २४३