यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 246, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध उन्नीसवां अध्याय विस्तार करते हैं, आप उस ब्रह्म स्वरूप से हमें पवित्र बनाने की कृपा कीजिए. ( ४१ ) पवमानः सो अद्य नः पवित्रेण विचर्षणिः. यः पोता स पुनातु मा.. (४२) आप पवित्र बनाने वाले हैं. आप आज अपनी पवित्रता से हमें सर्वज्ञ बनाने की कृपा कीजिए. स्वयं पवित्र हैं. हमें पवित्र बनाने की कृपा कीजिए. ( ४२ ) उभाभ्यां देव सवितः पवित्रेण सवेन च. मां पुनीहि विश्वतः.. (४३) सविता देव आप दोनों व दोनों सवनों से हमें पवित्र बनाने की कृपा करें. आप सब ओर से हमें पवित्र बनाने की कृपा करें. ( ४३ ) वैश्वदेवी पुनती देव्यागाद्यस्यामिमा बह्व्यस्तन्वो वीतपृष्ठाः. तया मदन्तः सधमादेषु वय ँ श्याम पतयो रयीणाम्.. (४४) यह विश्वे देवी हमें पवित्र बनाने की कृपा करें. यह विश्वे देवी हमें दिव्यता प्रदान करने की कृपा करें. ( ४४ ) ये समानाः समनसः पितरो यमराज्ये. तेषाँल्लोकः स्वधा नमो यज्ञो देवेषु कल्पताम्.. (४५) यम के राज्य में जो हमारे समान मान वाले और समान मन वाले पितर हैं, उन के लोक में हमारी स्वधा व नमस्कार पहुंचें. हमारा यज्ञ सभी देवताओं के लिए फलीभूत हो. ( ४५ ) ये समानाः समनसो जीवा जीवेषु मामकाः. तेषा ँ श्रीर्मयि कल्पतामस्मिँल्लोके शत ँ समाः.. (४६) जीवों में जो समान मान वाले और समान मन वाले जीव हैं, उन की शोभा मुझे फलीभूत करे. हम इस लोक में सौ वर्षों तक जीएं. हमारे साथ ये जुड़ कर रहें. ( ४६ ) द्वे सृती अशृणवं पितॄणामहं देवानामुत मर्त्यानाम्. ताभ्यामिदं विश्वमेजत्समेति यदन्तरा पितरं मातरं च.. (४७) हम ने मनुष्यों के जाने योग्य दो मार्ग सुने हैं. पहला पितृ मार्ग और दूसरा देव मार्ग. इन दोनों मार्गों से ही विश्व का सृजन हुआ है. मातापिता के संयोग से जीवों का निर्माण हुआ है. ( ४७ ) इद ँ हविः प्रजननं मे अस्तु दशवीर ँ सर्वगण ँ स्वस्तये. आत्मसनि प्रजासनि पशुसनि लोकसन्यभयसनि. अग्निः प्रजां बहुलां मे करोत्वन्नं पयो रेतो अस्मासु धत्त.. (४८) यह हवि हमारी संतान की बढ़ोत्तरी करने की कृपा करे. दसों अंगों की बढ़ोत्तरी २४६ - यजुर्वेद