भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 255, कुल 421 में से

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पृष्ठ 255

बीसवां अध्याय क्षत्रस्य योनिरसि क्षत्रस्य नाभिरसि. मा त्वा हि ँ सीन्मा मा हि ँ सी:.. (१) हे वेदिके! आप क्षत्रिय का उत्पत्ति स्थान हैं. आप क्षत्रिय की नाभि हैं. यह आसन आप को कष्ट न दे. आप भी हमें कष्ट मत दीजिए. (१) नि षसाद धृतव्रतो वरुणः पस्त्यास्वा. साम्राज्याय सुक्रतुः. मृत्योः पाहि विद्योत्पाहि.. (२) आप व्रतधारी, वरुण, पालक और साम्राज्य के लिए सैकड़ों यज्ञ करने वाले हैं. आप विद्युत् के उत्पात से रक्षा कीजिए. आप मृत्यु से बचाइए. (२) देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्याम्. अश्विनोर्भैषज्येन तेजसे ब्रह्मवर्चसायाभिषिञ्चामि सरस्वत्यै भैषज्येन वीर्यायान्नाद्यायाभिषिञ्चामीन्द्रस्येन्द्रियेण बलाय श्रियै यशसेभिषिञ्चामि.. (३) हम देवता सविता देव व अश्विनीकुमारों की बाहु हेतु आप को प्रतिष्ठित करते हैं. हम पूषा देव के हाथों के लिए आप को प्रतिष्ठित करते हैं. हम अश्विनीकुमारों की चिकित्सा के तेज से आप को प्रतिष्ठित करते हैं. हम ब्रह्मज्ञान के वर्चस्व हेतु आप को प्रतिष्ठित करते हैं. हम सरस्वती देवी के ओषधि उपचार से आप को प्रतिष्ठित करते हैं. हम अन्न व पराक्रम प्राप्ति हेतु आप को प्रतिष्ठित करते हैं. हम इंद्र देव के इंद्रिय बल व यश हेतु आप का अभिषेक करते हैं. (३) कोसि कतमोसि कस्मै त्वा काय त्वा. सुश्लोक सुमङ्गल सत्यराजन्.. (४) आप कौन हैं ? आप कौन से प्रजापति हैं ? आप किस के लिए हैं ? किस के लिए आप को प्रतिष्ठित किया जाता है ? आप की अच्छे श्लोक से स्तुति की जाती है. आप अच्छे कल्याणकारी, सत्यवान व राजा हैं. (४) शिरो मे श्रीर्यशो मुखं त्विषिः केशाश्च श्मश्रूणि. राजा मे प्राणो अमृत ँ सम्राट् चक्षुर्विराट् श्रोत्रम्.. (५) यजुर्वेद - २५५