यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ
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उत्तरार्ध इक्कीसवां अध्याय त्वामद्य ऋष ऽ आर्षेय ऋषीणां नपादवृणीतायं यजमानो बहुभ्य ऽ आ सङ्गतेभ्य ऽ एष मे देवेषु वसु वार्यायक्ष्यत ऽ इति ता या देवा देव दानान्यदुस्तान्यस्मा ऽ आ च शास्स्वा च गुरस्वेषितश्च होतरसि भद्रवाच्याय प्रेषितो मानुषः सूक्तवाकाय सूक्ता ब्रूहि.. (६१) आर्ष ऋषियों के मार्ग पर चलते हुए यजमान ने यज्ञ में सभी देवों का वरण किया. यजमान ने ऐश्वर्य की कामना से यज्ञ किया. इन देवगणों ने यजमान के लिए दिव्य दान किए. हे होताओ! आप सभी देवताओं का आह्वान कीजिए. आप भद्र वाणी से सभी देवताओं का आह्वान कीजिए. आप अच्छे वाणीमय सूत्रों से देवताओं का आह्वान कीजिए. ( ६१ ) यजुर्वेद - २८३