यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 284, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंबाईसवां अध्याय तेजोसि शुक्रममृतमायुष्पा ऽ आयुर्मे पाहि. देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेश्चिवनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्यामाददे.. (१) हे देव! आप तेजोमय, चमकीले, अमर व आयु की रक्षा करने वाले हैं. आप हमारी आयु की रक्षा कीजिए. सविता देव और अश्विनीकुमार की बाहु तथा पूषा देव के हाथों आप हम पर कृपा दान कीजिए. (१) इमामगृभ्णन् रशनामृतस्य पूर्व ऽ आयुषि विदथेषु कव्या. सा नो अस्मिन्त्सुत ऽ आ बभूव ऋतस्य सामन्तसरमारपन्ती.. (२) कवियों ने यज्ञ से ज्ञान पाया. ज्ञान से सृष्टि व आयु को जाना. वे हमारे पुत्रों के लिए ऋत को जानें. प्रकृति के रहस्यों को जान जाएं. (२) अभिधा असि भुवनमसि यन्तासि धर्त्ता. स त्वमग्निं वैश्वानर १४ सप्रथसं गच्छ स्वाहाकृतः.. (३) हे अश्व! आप दोनों लोकों के धारक, भुवन, नियंत्रक व धारक हैं. आप वैश्वानर अग्नि में आहुति दीजिए. आप आहुतिपूर्वक अपने निर्धारित स्थान तक पहुंचने की कृपा कीजिए. (३) स्वगा त्वा देवेभ्यः प्रजापतये ब्रह्मन्नश्वं भन्त्स्यामि देवेभ्यः प्रजापतये तेन राध्यासम्. तं बधान देवेभ्यः प्रजापतये तेन राध्नुहि.. (४) आप सर्वत्र गमन करने वाले हैं. आप देवों तक स्वयं जाने वाले हैं. आप प्रजापति तक पहुंचने वाले हैं. अग्नि ब्रह्मज्ञानी हैं. हम आप से देवताओं तक पहुंचने की प्रार्थना करते हैं. देवता और प्रजापति हमें सब प्रकार के धन प्रदान करने की कृपा करें. (४) प्रजापतये त्वा जुष्टं प्रोक्षामीन्द्राग्निभ्यां त्वा जुष्टं प्रोक्षामि वायवे त्वा जुष्टं प्रोक्षामि विश्वेभ्यस्त्वा देवेभ्यो जुष्टं प्रोक्षामि सर्वेभ्यस्त्वा देवेभ्यो जुष्टं प्रोक्षामि. यो अर्वन्तं जिघा १४ सति तमभ्यमीति वरुणः. परो मर्त्तः परः श्वा.. (५) प्रजापति सब के प्रिय हैं. हम प्रजापति की संतुष्टि हेतु आप का अभिषेक करते २८४ - यजुर्वेद