भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 300, कुल 421 में से

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पृष्ठ 300

उत्तरार्ध तेईसवां अध्याय करें. आप वायुलोक के दोष दूर करने की कृपा करें. हे परमात्मा! आप वायुलोक को परिपूर्ण बनाने की कृपा करें. सूर्य नक्षत्रों के साथ इस लोक को सज्जनता से पूरित करने की कृपा करें. ( ४३ ) शं ते परेभ्यो गात्रेभ्यः शमस्त्ववरेभ्यः. शमस्थिभ्यो मज्जभ्यः शम्वस्तु तन्वौ तव.. (४४) हे परमात्मा! आप की कृपा से हमारे शरीर के अंग विकारहीन हो जाएं. आप की कृपा से हमारे शरीर की हड्डियां व मज्जा विकारहीन हो जाएं. आप की कृपा से हमारे सुखों का विस्तार हो जाए. ( ४४ ) कः स्विदेकाकी चरति क ऽ उ स्विज्जायते पुनः. कि १४ स्विद्धिमस्य भेषजं किम्वावपनं महत्.. (४५) कौन अकेला विचरता है ? कौन बारबार उत्पन्न होता हैं? हिम की ओषधि कौन सी है ? अच्छी तरह बीज बोने का विशाल स्थान कौन सा है ? ( ४५ ) सूर्य ऽ एकाकी चरति चन्द्रमा जायते पुनः. अग्निर्गृहमस्य भेषजं भूमिरावपनं महत्.. (४६) सूर्य अकेले विचरते हैं. चंद्र देव बारबार उत्पन्न होते हैं. हिम की ओषधि अग्नि है. पृथ्वी बीज बोने का विशाल स्थान है. ( ४६ ) कि १४ स्वित्सूर्यसमं ज्योतिः कि १४ समुद्रसम १४ सरः. कि १४ स्वित्पृथिव्यै वर्षीयः कस्य मात्रा न विद्यते.. (४७) सूर्य के समान ज्योति कौन सी है ? समुद्र के समान तालाब कौन सा है ? पृथ्वी देवी से भी अधिक वर्षों वाला ( पुराना ) कौन है ? किस की कोई मात्रा ( परिमाण ) नहीं है ? ( ४७ ) ब्रह्म सूर्यसमं ज्योतिर्द्यौः समुद्रसम १४ सरः. इन्द्रः पृथिव्यै वर्षीयान् गोस्तु मात्रा न विद्यते.. (४८) ब्रह्म देव की ज्योति सूर्य की ज्योति के समान है. स्वर्गलोक समुद्र के समान तालाब है. इंद्र देव पृथ्वी देवी से भी पुराने हैं. गौ माता का कोई परिमाण नहीं है. ( ४८ ) पृच्छामि त्वा चितये देवसख यदि त्वमत्र मनसा जगन्थ. येषु विष्णुस्त्रिषु पदेष्वेष्टस्तेषु विश्वं भुवनमा विवेशाँ ३.. (४९) हे देवसखाओ! हम जिज्ञासु हैं. हम मन से आप से पूछते हैं कि क्या विष्णु ने अपने तीन पैरों में विश्व के सभी भुवनों को समा लिया ? क्या तीनों लोक विष्णु ३०० – यजुर्वेद